लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में एक कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग ने भयावह दृश्य प्रस्तुत किया, जहां आग इतनी तेजी से फैली कि वहां मौजूद लोगों के लिए बच पाना लगभग असंभव हो गया। आगजनी की घटना के चश्मदीद माला निगम ने बताया कि आग की शुरुआत एक एसी कंप्रेसर में हुए धमाके से हुई, जिसने पूरे भवन को अपनी आग की चपेट में ले लिया।
माला निगम ने बताया कि भवन में केवल एक ही मुख्य रास्ता था, जो अंदर आने और बाहर निकलने के लिए इस्तेमाल होता था। आग फैलने के कारण वह मार्ग भी अवरुद्ध हो गया, जिससे अंदर मौजूद लोग फंसे रह गए। इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर स्थित पेट शॉप में कई जानवर भी थे जिन्हें बचाने के लिए जल्दबाजी में प्रयास हुए, लेकिन परिस्थिति बहुत गंभीर थी।
उत्तरी मंजिलों पर कोचिंग सेंटर और लाइब्रेरी स्थित थीं, जहां पढ़ाई कर रहे छात्र भी trapped हो गए। वह सभी ऊपर छत तक भी नहीं पहुँच सके क्योंकि छत के रास्ते लॉक थे और इमारत का दरवाजा थंब लॉक सिस्टम से बंद था, जिसे बच्चे समय रहते नहीं खोल पाए। इस वजह से बच्चों के पास कोई सुरक्षित बचने का विकल्प उपलब्ध नहीं था।
आग को देखकर कई बच्चे घबराकर नीचे छलांग लगाने लगे, जिससे वे घायल हो गए। कुछ तो डर के कारण टॉयलेट में छिप गए, जबकि आग से निकल रही जहरीली गैसों और धुएं ने उनकी स्थिति और खराब कर दी थी। माला निगम बताते हैं कि आग की लपटें इतनी तीव्र थीं कि फायर ब्रिगेड के पहुंचने तक पास जाना भी खतरनाक था।
माला निगम, जो एक सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं, ने तुरंत घटना की जानकारी और वीडियो सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप ग्रुप्स के माध्यम से साझा किए ताकि आपातकालीन सेवाएं तेजी से मौके पर पहुंच सकें। उनका अनुभव इस भयावह हादसे का साक्ष्य है कि यदि भवन की सुरक्षा इंतजाम बेहतर होते और बचाव मार्ग खुले होते तो कई जानें बचाई जा सकती थीं।
यह अग्निकांड न केवल एक दुखद घटना है, बल्कि यह आग सुरक्षा नियमों की अनदेखी के कारण हुई क्षति भी उजागर करता है। विशेषज्ञों ने भी जांच प्रारंभ कर दी है ताकि इस तरह के हादसों को भविष्य में रोका जा सके। इस घटना से हमें आग सुरक्षा नियमों का पालन कराना आवश्यक हो जाता है, ताकि इस प्रकार के दर्दनाक हादसे दुबारा न हों।

