कोलकाता उच्च न्यायालय ने कोलकाता नगर निगम (KMC) के उस आदेश को फिलहाल रोक दिया है, जिसमें LIC के कर्मचारियों को जनगणना कार्य में लगाया जाना था। यह आदेश इस बात पर विवादास्पद था कि क्या LIC के स्टाफ को इस सरकारी जनगणना अभियान में शामिल किया जा सकता है या नहीं।
KMC ने शहर के विभिन्न इलाकों में जनगणना कार्य को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की आवश्यकता जताई थी। इसके तहत LIC के कर्मचारियों को अस्थायी रूप से जनगणना के लिए तैनात करने का प्रस्ताव रखा गया था। KMC का तर्क था कि अतिरिक्त मानव संसाधन की उपयोगिता से जनगणना कार्य समय पर और प्रभावी तरीके से पूरा किया जा सकेगा।
हालांकि, इस आदेश पर LIC के कुछ कर्मचारियों और अन्य काऱ्यों ने आपत्ति जताई, जिसके बाद मामला उच्च न्यायालय पहुंच गया। उच्च न्यायालय ने यह देखते हुए कि LIC एक स्वायत्त संस्था है और कर्मचारियों की मूल भूमिका बीमा कार्य से जुड़ी है, फिलहाल इस आदेश पर स्टे का निर्णय दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में विस्तृत सुनवाई के बाद ही आगे कोई फैसला लिया जाएगा।
विशेष रूप से अदालत ने यह भी ध्यान देने को कहा कि LIC कर्मचारियों को बिना उनकी सहमति के इस प्रकार के जनगणना कार्य में लगाना नियमों के विरुद्ध हो सकता है। जनगणना के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति एवं तैनाती के सारे नियम और अधिनियमों का पालन करना आवश्यक है।
कोलकाता नगर निगम के अधिकारियों ने कहा कि वे अदालत के आदेश का सम्मान करते हैं और मामले की अगली सुनवाई तक सभी गतिविधियां रोक दी जाएंगी। वहीं LIC की ओर से भी विभागीय नियमों की पालना को लेकर अदालत को आश्वासन दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी जनगणना जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया के लिए उपयुक्त मानव संसाधन का चयन सावधानी से किया जाना चाहिए। जनगणना डेटा पर आधारित योजना, विकास और नीति निर्धारण होते हैं, इसलिए इसमें किसी भी तरह की अनियमितता या विवाद से बचने के लिए सभी कदम उचित और कानूनी होनी चाहिए।
अगली सुनवाई में न्यायालय इस बात का विस्तृत परीक्षण करेगा कि ऐसी प्रशासनिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को कैसे तैनात किया जाना चाहिए, ताकि जनगणना कार्य प्रभावी और न्यायसंगत हो सके।
इस प्रकार, अभी LIC कर्मचारियों को जनगणना ड्यूटी पर तैनात करने का मामला अनिर्णित है और संबंधित पक्षों को अदालत के निर्णय का इंतजार करना होगा।

