इंदौर, राष्ट्रबाण। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर से एक बेहद सुखद और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। दीपावली के पावन पर्व से ठीक एक दिन पहले इंदौर के कमला नेहरू चिड़ियाघर में खुशियों ने जोरदार दस्तक दी है। चिड़ियाघर की पुरानी और प्रिय सदस्य मादा तेंदुए ने दो नन्हे-मुन्ने शावकों को जन्म दिया है। खास बात यह है कि इंदौर चिड़ियाघर के इतिहास में यह पहला मौका है जब यहाँ किसी तेंदुए ने शावकों को जन्म दिया है। इस दुर्लभ और खुशी के पल से पूरे चिड़ियाघर प्रबंधन और वन्यजीव प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह का माहौल है।
लंबे इंतजार के बाद आई खुशखबरी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इंदौर चिड़ियाघर में नर और मादा तेंदुए काफी लंबे समय से एक साथ रह रहे थे, लेकिन अब तक उनका परिवार आगे नहीं बढ़ पा रहा था। ये दोनों तेंदुए खुले पिंजरे (बाड़े) में रहते थे। कुछ दिन पहले ही चिड़ियाघर के चिकित्सकों और विशेषज्ञों को मादा तेंदुए के गर्भवती होने की भनक लगी थी, जिसके बाद से ही उसकी विशेष देखरेख शुरू कर दी गई थी। आखिरकार शनिवार को मादा तेंदुए ने दो स्वस्थ शावकों को जन्म देकर इस लंबे इंतजार को खत्म कर दिया।
शावक पूरी तरह स्वस्थ, मां की देखरेख में विशेष निगरानी
चिड़ियाघर प्रभारी डॉ. उत्तम यादव ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि मादा तेंदुए द्वारा दिए गए दोनों नवजात शावक पूरी तरह से स्वस्थ और सुरक्षित हैं। चूंकि इंदौर चिड़ियाघर के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि तेंदुओं का कुनबा यहाँ बढ़ा है, इसलिए प्रबंधन कोई कोताही नहीं बरत रहा है। फिलहाल दोनों शावक अपनी माँ के साथ सुरक्षित हैं और चिकित्सकों व पशु विशेषज्ञों की एक विशेष टीम लगातार उनकी 24 घंटे निगरानी कर रही है ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
पिछले दो सालों में चिड़ियाघर में जुड़े 15 से ज्यादा नए मेहमान
इंदौर चिड़ियाघर अपनी बेहतरीन प्रबंधन व्यवस्था और वन्यजीवों के अनुकूल प्राकृतिक माहौल के लिए देश भर में जाना जाता है। यहाँ ज्यादातर वन्यजीवों को खुले बाड़ों में रखा जाता है ताकि उन्हें बिल्कुल जंगल जैसा प्राकृतिक वातावरण मिल सके। इसी का परिणाम है कि पिछले दो वर्षों के भीतर इंदौर चिड़ियाघर में 15 से ज्यादा नए वन्यजीवों का जन्म हो चुका है। इन नए मेहमानों में बाघ, शेर, भालू, हिप्पोपोटेमस और अब तेंदुए भी शामिल हो चुके हैं।
पिछले एक दशक में शावकों के जन्म का शानदार रिकॉर्ड
इंदौर चिड़ियाघर वन्यजीवों के संरक्षण और उनके प्रजनन के मामले में बेहद सफल रहा है। पिछले आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले दस वर्षों में चिड़ियाघर में कुल 26 बाघ शावकों का जन्म हुआ है, जिनमें से 22 शावक पूरी तरह स्वस्थ होकर बड़े हुए हैं। पिछले दस वर्षों के दौरान इंदौर में 30 से अधिक शेर शावकों ने जन्म लिया है। यहाँ जन्म लेने वाले कई वन्यजीवों को देश के अन्य चिड़ियाघरों में एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत भेजा जाता रहा है, जिससे वन्यजीवों की प्रजातियों का संतुलन बना रहता है।
तेंदुए के इन दो नन्हे शावकों के आने से अब इंदौर चिड़ियाघर का आकर्षण पर्यटकों के लिए और अधिक बढ़ गया है, और दीपावली के इस मौके पर यह सौगात शहरवासियों के लिए किसी बड़े उपहार से कम नहीं है।



