मध्य प्रदेश में जल्द शुरू होगा ‘आयुष से आरोग्य’ अभियान; गांवों में योग, एआई और आयुष किट से सुधरेगी सेहत!

Rashtrabaan
Highlights
  • मध्य प्रदेश सरकार ग्रामीण स्तर पर स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने और आयुष सेवाओं को घर-घर तक पहुंचाने के लिए यह अनूठा अभियान शुरू करने जा रही है
  • केरल और तमिलनाडु के मॉडल के आधार पर पंजीकृत गर्भवती महिलाओं को अस्पतालों में प्रसव पूर्व जांच (ANC) के दौरान आयुष किट देने की योजना है

    भोपाल, राष्ट्रबाण। मध्यप्रदेश के गांवों में अब स्वास्थ्य और जीवनशैली को लेकर एक बड़ा बदलाव देखने को मिलने वाला है। राज्य सरकार ने ग्रामीण अंचल में स्वास्थ्य जागरूकता को घर-घर तक पहुंचाने के लिए कमर कस ली है। पंचायत स्तर पर योग, संतुलित खानपान और बेहतर जीवनशैली पर जोर देने के लिए महत्वाकांक्षी आयुष से आरोग्य अभियान की रूपरेखा तैयार की जा रही है। इस योजना के तहत पंचायतों को ग्रामीणों तक पारंपरिक आयुष सेवाएं पहुंचाने की मुख्य कड़ी बनाया जाएगा।

    पंचायत स्तर पर योग और स्वस्थ दिनचर्या की तैयारी

    इस अभियान का सबसे अहम पहलू गांवों में नियमित योगाभ्यास की व्यवस्था सुनिश्चित करना है। इसके लिए स्थानीय पंचायतों को उचित स्थान उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। वर्तमान में आयुष वेलनेस सेंटरों में प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक सेवाएं दे रहे हैं, और सरकार इसी मॉडल का विस्तार अब सीधे गांवों तक करने जा रही है। इसके लिए योग प्रशिक्षकों की तैनाती जाएगी। ये प्रशिक्षक न सिर्फ ग्रामीणों को नियमित योग अभ्यास कराएंगे, बल्कि उन्हें स्वस्थ दिनचर्या, बदलते मौसम के अनुसार खानपान और जीवनशैली में सुधार के गुर भी सिखाएंगे। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण आबादी को स्वास्थ्य संबंधी परामर्श और जागरूकता उनकी पहुंच के भीतर उपलब्ध कराना है, जिससे वे छोटी-मोटी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से दूर रह सकें।

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का अनूठा प्रयोग

    आयुष से आरोग्य अभियान को आधुनिक तकनीक से भी जोड़ा जा रहा है। योजना के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से लोगों की प्रकृति तथा वात, पित्त और कफ के असंतुलन का वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा। एआई तकनीक के जरिए संभावित स्वास्थ्य जोखिमों और समस्याओं के शुरुआती संकेत पहचाने जाएंगे। हालांकि, प्रशासन ने साफ किया है कि एआई से मिलने वाले संकेत किसी बीमारी की पक्की पुष्टि नहीं होंगे। इसके आधार पर केवल शुरुआती आयुष परामर्श और जीवनशैली में सुधार की सलाह दी जाएगी, लेकिन बीमारी के निदान के लिए चिकित्सकीय जांच कराना अनिवार्य होगा।

    तीन विभागों का समन्वय बनेगा अभियान की ताकत

    इस व्यापक अभियान को सफलतापूर्वक जमीन पर उतारने के लिए शासन स्तर पर बहु-विभागीय समन्वय पर जोर दिया जा रहा है। यह योजना मुख्य रूप से आयुष विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, स्वास्थ्य सेवा विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त सहयोग से लागू की जाएगी। पंचायत विभाग, गांवों में योगाभ्यास और गतिविधियों के लिए स्थान की व्यवस्था करेगा। स्वास्थ्य विभाग गर्भवती महिलाओं से जुड़ी स्वास्थ्य सेवाओं और प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) में सहयोग देगा। महिला एवं बाल विकास विभाग, बच्चों में कुपोषण और पोषण संबंधी गतिविधियों को संचालित करने में अहम भूमिका निभाएगा। फिलहाल, पंचायत विभाग के साथ बैठकें पूरी हो चुकी हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग के साथ आगामी बैठकों का दौर प्रस्तावित है। योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू करने के लिए एक ठोस कार्य-योजना बनाई जा रही है।

    कुपोषण और लाइफस्टाइल बीमारियों पर कड़ा प्रहार

    बदलती जीवनशैली के कारण ग्रामीण इलाकों में भी मधुमेह (डाइबिटीज), मोटापा और उच्च रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) जैसी बीमारियां पैर पसार रही हैं। इस अभियान के जरिए इन पर लगाम कसने की तैयारी है। महिला एवं बाल विकास विभाग के समन्वय से जरूरतमंद बच्चों तक पौष्टिक और स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जाएंगी। कुपोषण के मुकाबले के लिए आयुष औषधियों के वितरण का प्रस्ताव भी है, हालांकि इसके उपयोग और क्रियान्वयन के लिए स्पष्ट मानक तय किए जा रहे हैं।

    गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष ‘आयुष किट’

    मातृ स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए अस्पतालों में प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) के लिए आने वाली पंजीकृत गर्भवती महिलाओं को ‘आयुष किट’ देने की खास योजना बनाई गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर आयुष विभाग के एक चार सदस्यीय दल ने केरल और तमिलनाडु का दौरा किया था, जहां की व्यवस्थाओं का अध्ययन करके रिपोर्ट सौंपी गई है। केरल में गर्भवती महिलाओं को दी जाने वाली आयुष किट की तर्ज पर ही मध्यप्रदेश में भी इसे लागू करने पर विचार चल रहा है। आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार का कहना है कि रिपोर्ट के आधार पर प्रदेश की जरूरतों के अनुसार कार्ययोजना तैयार की जा रही है। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि गर्भावस्था में किसी भी दवा का सेवन केवल डॉक्टर की सलाह से ही होना चाहिए और यह किट किसी भी हाल में नियमित प्रसव पूर्व जांच का विकल्प नहीं होगी।

    क्रियान्वयन की प्रक्रिया अभी बाकी

    योजना की घोषणा के बाद अब इसके धरातल पर उतरने का इंतजार है। इसके लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन, औषधियों के मानक, एआई आकलन की विश्वसनीयता और चिकित्सकीय जांच से जुड़ी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। इन तमाम औपचारिकताओं के स्पष्ट होने के बाद ही गांवों में इस महत्वाकांक्षी अभियान का वास्तविक और विस्तृत दायरा सामने आएगा।

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