एमपी में OBC आरक्षण विवाद: हाईकोर्ट के आदेश पर अमल न होने पर सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों ने मुख्य सचिव को भेजा कानूनी नोटिस

Rashtrabaan

    भोपाल, राष्ट्रबाण। मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण विवाद और अटके हुए परीक्षा परिणामों का मामला अब और अधिक गरमाता जा रहा है। उच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बाद भी परिणाम जारी न किए जाने से नाराज सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों ने कड़ा रुख अपनाते हुए मध्य प्रदेश शासन के मुख्य सचिव को लीगल नोटिस भेज दिया है।

    मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की ओर से यह बड़ा कदम उठाया गया है। उच्च न्यायालय में सामान्य वर्ग की पैरवी करने वाले अधिवक्ता अंशुल तिवारी ने उम्मीदवारों की ओर से इस विधिक सूचना पत्र के भेजे जाने की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। उन्होंने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया है कि राज्य सरकार अदालत के आदेशों का पालन करने में हीला-हवाली कर रही है, जिससे युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है।

    अदालती आदेश की अनदेखी का गंभीर आरोप

    सामने आए कानूनी सूचना पत्र में राज्य सरकार और प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। पैरवी करने वाले अधिवक्ता ने जानकारी दी कि मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की कई प्रमुख परीक्षाओं में 13 प्रतिशत पदों को लंबे समय से लंबित रखा गया है। अदालत से स्पष्ट और सख्त निर्देश मिलने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर इन रोके गए परिणामों को घोषित करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इस उदासीन रवैये से आहत होकर प्रभावित अभ्यर्थियों ने शासन के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारियों का दरवाजा खटखटाया है और वैधानिक नोटिस जारी किया है। इस नोटिस की प्रतियां केवल मुख्य सचिव तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के प्रमुख सचिव और मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) के उच्चाधिकारियों को भी आधिकारिक रूप से प्रेषित की गई हैं।

    साक्षात्कार देने के बाद भी नतीजों का इंतजार, अनिश्चितता के दौर में युवा

    यह पूरा कानूनी विवाद मुख्य रूप से उन प्रतिभाशाली प्रतियोगी अभ्यर्थियों से जुड़ा हुआ है, जो लोक सेवा आयोग की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के अंतर्गत लिखित परीक्षा से लेकर इंटरव्यू तक की लंबी और कठिन प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं। विवादित 13 प्रतिशत श्रेणी के तहत साक्षात्कार देने के उपरांत भी इन अभ्यर्थियों के अंतिम परिणाम आयोग द्वारा रोक कर सुरक्षित रख लिए गए हैं। महीनों और सालों से परिणाम घोषित न होने के कारण इन उम्मीदवारों के मन में गहरी अनिश्चितता और निराशा का माहौल बना हुआ है। युवाओं का कहना है कि वे लगातार प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है।

    अभ्यर्थियों की दो टूक, अविलंब उठाए जाएं कदम

    उच्च न्यायालय द्वारा पहले ही इस मामले में कई निर्देश जारी किए जा चुके हैं, जिनका पालन कराने के लिए अब अभ्यर्थियों ने प्रशासनिक अधिकारियों से अविलंब और कड़े कदम उठाने का पुरजोर अनुरोध किया है। कानूनी नोटिस के माध्यम से यह साफ कर दिया गया है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही रोके गए परिणामों को घोषित करने की प्रक्रिया शुरू नहीं की, तो अभ्यर्थी कानूनी लड़ाई को और अधिक आक्रामक रूप देंगे। बहरहाल, इस विधिक नोटिस के बाद से प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि शासन और आयोग इस पर क्या कानूनी प्रतिक्रिया देते हैं।

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