प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शस्त्र लाइसेंसों के दुरुपयोग और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को हथियार लाइसेंस जारी करने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार एवं सभी जिलों के पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। इस बीच रघुराज प्रताप सिंह राजा भैय्या, धनंजय सिंह, बृजभूषण शरण सिंह समेत 19 प्रभावशाली बाहुबलियों के शस्त्र लाइसेंसों की जानकारी मांगते हुए कोर्ट ने मामले की गंभीरता पर जोर दिया है।
न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने सुनवाई के दौरान कहा कि हथियारों का सार्वजनिक प्रदर्शन समाज में भय और असुरक्षा का माहौल बनाता है, जो कानून और सामाजिक शांति की भावना के खिलाफ है। कोर्ट ने गृह विभाग के संयुक्त सचिव द्वारा 20 मई 2026 को दाखिल हलफनामे का हवाला देते हुए बताया कि प्रदेश के सभी 75 जिलों के प्रशासनिक अधिकारी नियमों का सही पालन नहीं कर रहे हैं।
दस लाख से अधिक शस्त्र लाइसेंस जारी
अभी तक प्रदेश में कुल 10,08,953 शस्त्र लाइसेंस जारी हो चुके हैं। 23,407 आवेदन लंबित हैं जबकि 1,738 अपीलें मंडलायुक्तों के समक्ष पेंडिंग हैं। इसके अतिरिक्त 20,960 परिवारों के पास एक से अधिक लाइसेंस हैं और 6,062 व्यक्तियों के खिलाफ दो या अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, फिर भी उन्हें लाइसेंस दिया गया है।
हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लाइसेंस धारकों के नाम, जिला एवं थाना के साथ पूरी जानकारी प्रस्तुत की जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्वच्छ प्रशासन में निष्पक्षता व गैर-भेदभाव की जरूरत है।
कोर्ट ने कहा कि स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने कुछ प्रभावशाली बाहुबलियों के संबंध में जानकारियां छिपाई हैं, जो समाज में गलत संदेश पहुंचाती हैं। इसलिए इन सभी व्यक्तियों के हथियार लाइसेंस, आपराधिक पृष्ठभूमि, सुरक्षा व्यवस्था एवं नजरबंदी की स्थिति की विस्तृत जानकारी जरूरी है।
हथियार प्रदर्शन पर कोर्ट का विरोध
हाईकोर्ट ने हथियारों के सार्वजनिक प्रदर्शन पर भी कड़ी आपत्ति जताई। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर हथियारों की न केवल खोलकर दिखावट की जा रही है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी उनके फोटो-वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिससे एक गलत संस्कृति विकसित हो रही है। कोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस से पूछा क्या इस दिशा में कोई प्रभावी कदम उठाया गया है।
सरकार के हलफनामे में चर्चित बाहुबलियों के नाम न होने पर कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त की। इसी को लेकर उसने 19 बाहुबलियों की एक सूची बनाई और उनका पूरा आपराधिक इतिहास और लाइसेंस संबंधी विवरण तलब किया।
सुरक्षा और लाइसेंस पर सवाल
हाईकोर्ट ने केवल हथियार लाइसेंस ही नहीं, बल्कि इन बाहुबलियों को मिली सरकारी सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट जानना चाहता है कि जिन पर गंभीर मुकदमे चल रहे हैं, उन्हें सुरक्षा क्यों और किस आधार पर मिली है तथा क्या इससे कानून व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
आगे की कार्रवाई पर नजर
हाईकोर्ट की कड़ी कार्रवाई के बाद यह चर्चा तेजी से हो रही है कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जांच में नियमों का उल्लंघन या गलत जानकारी सामने आती है तो प्रशासन को सख्त कदम उठाने का अधिकार होगा। अंतिम फैसला कोर्ट और अधिकारियों के हस्तक्षेप पर निर्भर करेगा।
अदालत ने अपर मुख्य सचिव गृह, पुलिस विभाग और सभी जिलाधिकारियों को आदेश दिया है कि वे 26 मई 2026 तक पूरे मामले में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें और यह सुनिश्चित करें कि किसी महत्वपूर्ण तथ्य को छिपाया न जाए।

