सांसद सुधाकर सिंह ने राम मंदिर ट्रस्ट को भेजा कानूनी नोटिस, चंदे और खर्च का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की मांग

Rashtrabaan

    बिहार के बक्सर से राजद के सांसद सुधाकर सिंह ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के खानापूरा चंदे और खर्च संबंधी पारदर्शिता की मांग करते हुए एक कानूनी नोटिस भेजा है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास, महासचिव चंपत राय और कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि को भेजे गए इस नोटिस में ट्रस्ट से वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक की जमा राशि, खर्च, ऑडिट रिपोर्ट, बैंक विवरण सहित विदेशी चंदे का ब्योरा सार्वजनिक करने को कहा गया है।

    रिपोर्टों में सामने आई चोरी की खबरों के बीच यह कदम उठाया गया है ताकि लाखों भक्तों द्वारा दिये गए चंदे की जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। सांसद के वकील एडवोकेट सत्यम सिंह राजपूत ने स्पष्ट किया कि यह नोटिस जनहित में जारी हुआ है और इसका कोई राजनीतिक या पक्षपाती मकसद नहीं है। उन्होंने कहा कि जहां जनता का पैसा शामिल होता है, वहाँ पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक है।

    सुधाकर सिंह ने कहा, ‘मेरा मकसद सिर्फ भक्तों के दान का पारदर्शी हिसाब रखना है। जमीन की खरीद, खातों की ऑडिट रिपोर्ट न देना और खर्च में गड़बड़ी के आरोप चिंताजनक हैं। ट्रस्ट को अपना वित्तीय विवरण स्पष्ट और सार्वजनिक तौर पर देना चाहिए।’

    नोटिस में इंडियन ट्रस्ट्स एक्ट, इनकम टैक्स एक्ट, उत्तर प्रदेश पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट और प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट जैसे कानूनों का उल्लेख किया गया है जो ट्रस्ट को सही हिसाब-किताब रखने का दायित्व देते हैं। साथ ही मद्रास हाई कोर्ट के नवीनतम फैसले का हवाला भी दिया गया, जिसमें कहा गया है कि पब्लिक धार्मिक संस्थाओं को मिले दान ट्रस्टियों की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि समुदाय की बल्कि अपनी पारदर्शिता के लिएड़ेनदारी से उपलब्ध कराई गई है।

    नोटिस में ट्रस्ट को तीन दिनों के भीतर जवाब देने को कहा गया है, एवं अगर संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो इस मामले को कानूनी मंच तक ले जाने की बात कही गई है। इस पहल को सार्वजनिक हित तथा धार्मिक संस्थाओं में वित्तीय जवाबदेही के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    यह मामला देश में धार्मिक संस्थाओं के वित्तीय लेन-देन की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर जागरूकता बढ़ाने में सहायक होगा। जनता के विश्वास को स्थिर करने के मामले में ऐसे कदम अपेक्षित हैं ताकि सभी धार्मिक ट्रस्ट अपने दान के फंड का सही हिसाब-किताब दे सकें और किसी भी अनियमितता को समाप्त किया जा सके।

    इस संदर्भ में, ट्रस्ट की ओर से भी उम्मीद जताई जा रही है कि वे आवश्यक वित्तीय विवरण समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से प्रदान करेंगे।

    आईएएनएस के इनपुट के साथ

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