अयोध्या: रामलला के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के मामले सामने आने के बाद श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। जांच में जुटी विशेष जांच टीम (एसआईटी) को न केवल मामले के तथ्यों की जांच का काम सौंपा गया है, बल्कि वे प्रशासनिक सुधार के सुझाव भी देंगी। केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की सोच रही है।
ट्रस्ट में सीईओ नियुक्ति पर विचार
उच्च स्तरीय सूत्रों का कहना है कि जल्द ही ट्रस्ट में मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) के पद की स्थापना या नियुक्ति पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इस पद के लिए सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को नियुक्त करने की संभावना है। मुख्य उद्देश्य मंदिर में प्राप्त चढ़ावे, दान और अन्य संपत्तियों के प्रबंधन में वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। सरकार देश के अन्य प्रमुख मंदिरों की व्यवस्थाओं को देख रही है जहां प्रशासनिक अधिकारियों की देखरेख प्रभावी ढंग से हो रही है, ताकि उसी मॉडल को अयोध्या में लागू किया जा सके।
2020 में ट्रस्ट का गठन
9 नवंबर 2019 के सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय के बाद, केंद्र सरकार ने 5 फरवरी 2020 को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया था। इस ट्रस्ट में कुल 15 सदस्य होते हैं, जिनमें 12 मनोनीत और 3 पदेन सदस्य होते हैं। पदेन सदस्यों में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और अयोध्या के जिलाधिकारी शामिल हैं। वर्तमान में ट्रस्ट में 14 सदस्य कार्यरत हैं जबकि एक पद रिक्त है। विश्व हिंदू परिषद के नेता कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद कृष्ण मोहन को नियुक्त किया गया था। 24 अगस्त 2025 को ट्रस्टी बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन से एक पद फिर खाली हो गया, जिसे अभी भरा नहीं गया है।
रिक्त पद पर मंथन और नए पद सृजन की संभावना
सूत्र बताते हैं कि इस रिक्त पद का उपयोग सीईओ की नियुक्ति के लिए किया जा सकता है या फिर ट्रस्ट के अंदर एक नया प्रशासनिक पद बनाया जाएगा ताकि कार्यप्रणाली और पेशेवर तरीके से संचालित हो सके। इस संबंध में कानूनी और प्रशासनिक दोनों पहलुओं पर विचार चल रहा है।
एसआईटी की जांच तीसरे दिन भी जारी
राम मंदिर से जुड़े चढ़ावा प्रकरण की जांच कर रही एसआईटी ने लगातार तीसरे दिन मंदिर परिसर में गहन जांच जारी रखी। टीम ने कई वर्षों के वित्तीय अभिलेखों की समीक्षा की और विभिन्न विभागों के कर्मचारियों से बयान लिए। खासकर उन कर्मियों से पूछताछ हुई जो नकदी प्रबंधन से सीधे से जुड़े नहीं हैं, पर सुरक्षा एवं अंदरूनी व्यवस्थाओं में कार्यरत हैं। जांच का उद्देश्य चढ़ावे की संग्रह, सुरक्षा एवं बैंक तक पहुंचाने की प्रक्रिया में किसी भी कमी को खोजना है।
अब तक 60 कर्मचारियों से पूछताछ
एसआईटी का अस्थायी कार्यालय मंदिर परिसर स्थित ग्रीन हाउस में बनाया गया है, जहां पूरे दिन पूछताछ और दस्तावेजों की जाँच होती रही। प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी की जा रही है ताकि सभी गतिविधियों का रिकॉर्ड सुरक्षित रहे। अब तक लगभग 60 कर्मचारियों से पूछताछ हो चुकी है और शेष कर्मचारियों के बयान भी जल्द दर्ज किए जाएंगे। बुधवार रात करीब नौ बजे तक टीम परिसर में मौजूद रही और जांच जारी रखी।
पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
चढ़ावा प्रकरण के बाद मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाने का प्रयास तेज हो गया है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में सुधार और नई व्यवस्थाएं लागू की जाएंगी, जिससे दान, चढ़ावा तथा संपत्तियों के प्रबंधन में कड़ी निगरानी और वित्तीय अनुशासन को सुनिश्चित किया जा सकेगा। यह कदम मंदिर प्रशासन की विश्वसनीयता को मजबूत करेगा और आम श्रद्धालुओं में विश्वास बढ़ाएगा।

