आरजेडी के सांसद सुधाकर सिंह ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को एक कानूनी नोटिस जारी किया है, जिसमें ट्रस्ट से दान राशि और उसके खर्च का विस्तृत विवरण मांगा गया है। यह नोटिस सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से भेजा गया है, जिसमें तीन दिन के भीतर आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने की मांग की गई है। सांसद का कहना है कि यह कदम पूरी तरह जनहित में उठाया गया है और इसका उद्देश्य केवल पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
नोटिस में वित्तीय वर्ष 2021-22 से लेकर 2025-26 तक ट्रस्ट को मिलने वाले दान, उनके उपयोग सहित वित्तीय रिकार्ड उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, ऑडिटेड बैलेंस शीट, आय-व्यय का पूरा ब्यौरा, ऑडिटर की रिपोर्ट और ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई जमीनों का विवरण भी मांगा गया है। संसद सदस्य ने कहा कि सार्वजनिक दान के मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक है, क्योंकि इसमें करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और सहयोग शामिल होता है।
राम जन्मभूमि ट्रस्ट से मांगी गई जानकारियां
कानूनी नोटिस में दान और खर्च के अलावा ट्रस्ट के बैंक खातों तथा विदेशी अंशदान (FCRA) से जुड़ी जानकारी भी मांगी गई है। इसके अलावा ट्रस्ट द्वारा समय-समय पर खरीदी गई जमीनों का पूरा विवरण प्रस्तुत करने को कहा गया है। नोटिस में इस बात पर बल दिया गया है कि यदि कोई धार्मिक ट्रस्ट सार्वजनिक दान बड़ी मात्रा में प्राप्त करता है तो उसके वित्तीय लेन-देन की पूरी पारदर्शिता जरूरी है।
सुधाकर सिंह ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी संस्था की छवि को नुकसान पहुंचाना नहीं है, बल्कि सार्वजनिक धन के उचित उपयोग में स्पष्टता लाना है। नोटिस में भारतीय ट्रस्ट अधिनियम, आयकर अधिनियम, उत्तर प्रदेश पब्लिक ट्रस्ट अधिनियम और धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) का जिक्र किया गया है। साथ ही मद्रास हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा गया है कि धार्मिक संस्थाओं को भी दान-खर्च में पारदर्शिता बनाए रखनी चाहिए। नोटिस में तय समय सीमा के भीतर जवाब न मिलने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
आगे की कार्रवाई पर नजर
इसी बीच राम मंदिर में कथित चंदा चोरी के मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी भी अपनी जांच लगातार जारी रखे हुए है। जांच टीम राम जन्मभूमि परिसर में मौजूद रहकर विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। सूचना के अनुसार, आईटी विशेषज्ञों की टीम डिजिटल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही है ताकि मामले से जुड़ी सभी सच्चाइयों को उजागर किया जा सके।

