मुरादाबाद। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. एसटी हसन ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में सपा-कांग्रेस गठबंधन की अहमियत पर जोर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्षी दलों का एकजुट होना जरूरी है ताकि भाजपा को पराजित किया जा सके और प्रदेश व देश की सेहत बेहतर बन सके। डॉ. हसन ने सभी दलों से अपील की है कि वे ऐसे बयानों से बचें जो सपा और कांग्रेस के बीच दूरी बढ़ाएं, क्योंकि इससे भाजपा को लाभ पहुंचने की संभावना बढ़ जाती है।
डॉ. हसन ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा को प्रत्यक्ष चुनौती देने की क्षमता मूल रूप से समाजवादी पार्टी के पास है, लेकिन कांग्रेस के साथ गठबंधन से दोनों दलों की ताकत और बढ़ेगी। उन्होंने सीटों के बंटवारे एवं चुनावी रणनीति के लिए बड़े नेताओं के फैसले को महत्त्वपूर्ण बताया और कहा कि इस प्रक्रिया में दोनों दलों के ट्रैक रिकॉर्ड, वोट प्रतिशत और संगठनात्मक शक्ति को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
उन्होंने विपक्षी दलों के बीच दूरी बढ़ाने वाले बयानों की कड़ी आलोचना की और चेतावनी दी कि इस तरह के बयान भारत की राजनीति और खासकर मुसलमानों की स्थिति के लिए नुकसानदायक होंगे। उन्होंने कहा कि मुसलमानों की वर्तमान स्थिति के लिए जिम्मेदारों की पहचान करनी होगी और सबको मिलकर इसी दिशा में काम करना होगा।
कांग्रेस नेता इमरान मसूद द्वारा की गई आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. हसन ने कहा कि अखिलेश यादव ने हमेशा अल्पसंख्यकों व खासकर मुसलमानों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई है। चाहे मॉब लिंचिंग हो, कथित फर्जी एनकाउंटर्स या अन्य अन्याय, उन्होंने न्याय की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि राम मंदिर विवाद पर भी यदि अखिलेश यादव ने अपनी राय दी है, तो उसमें आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
डॉ. हसन ने कहा कि समाजवादी पार्टी किसी भी वर्ग विशेष का तुष्टिकरण नहीं करती, बल्कि सभी के समान अधिकार और न्याय की बात करती है। उन्होंने दावा किया कि मुसलमानों के रोजगार और सम्मान के लिए सबसे अधिक प्रयास समाजवादी पार्टी ने किया है। इसी वजह से मुसलमानों का झुकाव समाजवादी पार्टी की ओर अधिक है।
डॉ. हसन ने सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन की आवश्यकता को दोहराते हुए कहा यदि दोनों दल अकेले चुनाव लड़ेंगे तो भाजपा को बड़ा लाभ होगा, जिससे विपक्ष की संभावना कम हो जाएगी। उन्होंने मजबूत विपक्ष की जरूरत पर बल दिया क्योंकि विभिन्न समुदायों और वर्गों को साथ लेकर चलने की जरूरत है।
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी द्वारा मुस्लिम मुख्यमंत्री चेहरे की मांग पर उन्होंने कहा कि ऐसे विवादित कदम मुसलमानों के हित में नहीं होंगे। वर्तमान में मुसलमान कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, जैसे मॉब लिंचिंग और कथित एनकाउंटर्स। ऐसे में समुदाय को बांटने वाली बातों से बचना चाहिए और एकजुट होकर अन्याय के विरुद्ध लड़ना चाहिए।
लखनऊ सहित कई जिलों में अखिलेश यादव से जुड़े पोस्टरों को लेकर डॉ. हसन ने कहा कि सपा को पहले ‘नमाजवादी पार्टी’ कहा जाता था, अब ‘यादवों की पार्टी’ कहा जाता है, लेकिन वास्तव में सपा सभी के लिए है। उन्होंने बताया कि पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (पीडीए) वर्ग के लिए न्याय की लड़ाई लड़ना सपा की प्राथमिकता है। डॉ. हसन ने कहा कि अखिलेश यादव देश और संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अक्सर सपा से सवाल किए जाते हैं, लेकिन अन्य सेक्युलर दलों से यह पूछा जाना चाहिए कि वे मुसलमानों को कितना राजनीतिक प्रतिनिधित्व देते हैं। डॉ. हसन ने दावा किया कि सपा में सबसे अधिक मुस्लिम विधायक हैं और पार्टी मुसलमानों को उचित राजनीतिक जगह देती है। उन्होंने समाप्ति पर कहा कि जो भी सपा या कांग्रेस को कमजोर करने की कोशिश करेगा, उसके कारण भाजपा को फायदा होगा। इसलिए सभी को मिलकर मजबूत विपक्ष निर्माण के लिए काम करना होगा।

