लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी का दौर तेजी से बढ़ रहा है। प्रदेश सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर और भाजपा के कुछ नेताओं द्वारा समाजवादी पार्टी (सपा) में संभावित टूट और कई सांसदों के संपर्क में होने के दावों के खिलाफ सपा ने तीखा पलटवार किया है। सपा के वरिष्ठ नेता फखरुल हसन चांद ने कहा कि ओमप्रकाश राजभर को पहले अपनी पार्टी की बिगड़ती स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। उनके अनुसार, राजभर के बयानों को सपा गंभीरता से नहीं लेती।
फखरुल हसन चांद ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि राजभर के पास कुल छह विधायक हैं, जिनमें से एक स्वयं राजभर हैं और एक अन्य उनके पेपर लीक मामले से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि शेष चार विधायक सपा के झंडे के साथ घूमते हैं। उन्होंने जोर दिया कि राजभर की पार्टी खुद बिखराव की स्थिति में है और उनके पुत्र भी सपा प्रमुख अखिलेश यादव से पिछड़ों की राजनीति को बचाने तथा सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के सपा में विलय की मांग कर रहे हैं।
उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि राजभर भाजपा के दबाव में हैं और भाजपा द्वारा उन्हें जो बातें समझाई जाती हैं, वे ही वे सार्वजनिक रूप से दोहराते हैं। इसलिए सपा उनके किसी भी दावे को गंभीरता से नहीं लेती।
इसी बीच, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह द्वारा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को कानूनी नोटिस भेजकर चंदे का ब्योरा मांगे जाने की घटना पर भी फखरुल हसन चांद ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस मामले में पारदर्शिता अत्यंत जरूरी है। उन्होंने याद दिलाया कि इस मुद्दे को सबसे पहले सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उठाया था। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रहा है, इसलिए फिलहाल सपा कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं करेगी।
फखरुल हसन चांद ने भाजपा पर राजनीतिक बदले की भावना से काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा विपक्षी नेताओं के साथ भेदभाव कर रही है और ऐसा प्रतीत होता है कि वह बदले की राजनीति में विश्वास रखती है। विपक्षी नेताओं की सुरक्षा कम की जा रही है, जबकि सरकार के पक्ष में रहने वालों को विशेष सुरक्षा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में सरकार के करीबी कई माफिया सुरक्षा घेरे में हैं।
उन्होंने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा और उनके स्टाफ में कटौती का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतंत्र में इस प्रकार की कार्रवाई स्वीकार्य नहीं हो सकती। लोकतंत्र की मजबूती के लिए सरकार और विपक्ष दोनों का सम्मान जरूरी है, लेकिन भाजपा का लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास नज़र नहीं आता।
नीट परीक्षा में पेपर लीक की घटनाओं को लेकर हुई उच्चस्तरीय बैठक पर भी उन्होंने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिन मंत्रियों के कार्यकाल में दो बार नीट पेपर लीक हो चुका है, वे अब सख्त निर्देश देने का दावा कर रहे हैं। उनकी भाषा में यह सरकार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह असफल रही है। ऐसे हालात में बैठकें और आदेश जारी करना ही रहता है, मंत्री इस्तीफा देने को तैयार नहीं होते।
वहीं, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के किसी भी राजनीतिक गठबंधन में शामिल होने की घोषणा के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई हलचल शुरू हो गई है। इस पर फखरुल हसन चांद ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इससे इंडिया गठबंधन और मजबूत होगा।

