ट्रस्ट ने अपनी रिपोर्ट दर्ज कराई, राम मंदिर मामले में बड़ा खुलासा
अयोध्या/लखनऊ। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के संदर्भ में आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। यह एफआईआर ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत के आधार पर दर्ज हुई है, जो इस मामले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।
एसआईटी की जांच के बीच ट्रस्ट ने खुद अपनी रिपोर्ट लिखवाई, जिससे जांच का दायरा और गंभीरता दोनों बढ़ गए हैं। एफआईआर में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम शामिल नहीं है, जबकि उनके सहयोगी टिन्नू यादव का नाम आरोपी के रूप में है। सूत्रों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज में चोरी करते हुए दिखाये गए लोगों और उनकी सहायता करने वालों के खिलाफ यह मामला दर्ज किया गया है।
कुछ समय पहले यह खबर आई थी कि स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में 17 लोगों को आरोपी माना था, जिनमें चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और निर्माण प्रभारी गोपाल राव जैसे नाम भी थे। उनसे संबंधित एफआईआर के दर्ज होने की उम्मीद जताई जा रही थी।
इस बीच, राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने लखनऊ में एसआईटी अध्यक्ष विजय विश्वास पंत से मुलाकात कर जमीन घोटाले से जुड़ी अहम दस्तावेज सौंपे और सवाल उठाए कि चोरी के सारे सबूत मिलने के बाद भी अब तक किसी की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई। उन्होंने यह भी कहा कि एफआईआर दर्ज न होना और दोषियों पर तत्काल कार्रवाई न होना चौंकाने वाला है।
अब तक एसआईटी की जांच जारी थी, लेकिन ट्रस्ट की तरफ से एफआईआर दर्ज होने से पुलिस अब आईपीसी की संगत धाराओं के तहत कड़ी जांच करेगी। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि राम मंदिर की गरिमा को कोई समझौता नहीं होगा और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। इससे साफ संकेत मिलता है कि इस मामले में सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला अयोध्या में धार्मिक व सामाजिक रूप से अत्यंत संवेदनशील है, इसलिए न्यायिक प्रक्रिया को लेकर सभी पक्ष सतर्क और सावधान हैं। राम मंदिर परिसर की सुरक्षा और प्रतिष्ठा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि किसी भी प्रकार का अनैतिक या गैरकानूनी कार्य अंजाम न पा सके।
इस कदम के बाद अयोध्या और आसपास के इलाकों में लोग इस मामले पर बड़ी नजरे बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रस्ट की स्वयं की रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज कराना जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि धार्मिक स्थलों पर संपत्ति और चढ़ावे की सुरक्षा के लिए और सख्त नियम लागू हों।

