नोएडा। गौतमबुद्धनगर में 13 अप्रैल को हुए श्रमिकों के धरना-प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसक घटनाओं की जांच के लिए प्रशासन ने मजिस्ट्रियल जांच कराने का निर्णय लिया है। इस गंभीर मामले की सूचना अपर पुलिस आयुक्त अजय कुमार ने दी, जिन्होंने बताया कि इस जांच में आम लोगों से घटना सम्बंधी मौखिक, लिखित और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मांगे गए हैं।
प्रशासन की ओर से जारी बयान के अनुसार, 13 अप्रैल को थाना फेस-2 और थाना सेक्टर-63 के क्षेत्रों में कामगारों ने धरना-प्रदर्शन किया था, जो धीरे-धीरे हिंसक रूप ले गया। विभिन्न जगहों पर उपद्रव और हिंसा की घटनाएं सामने आईं, जिससे कानून और व्यवस्था प्रभावित हुई। पुलिस को स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा।
घटना के दौरान तोड़फोड़ और अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होने के कारण शासन स्तर पर संपूर्ण घटनाक्रम की मजिस्ट्रियल जांच कराने की मंजूरी दी गई है। जांच का उद्देश्य हिंसा की वास्तविक वजहों, शामिल कारकों और प्रभावित पक्षों की पहचान करना है। साथ ही यह पता लगाना है कि कहीं किसी व्यक्ति या संगठन द्वारा श्रमिकों को भड़काने का प्रयास तो नहीं किया गया था।
अजय कुमार ने बताया कि यदि किसी के पास इस घटना से संबंधित वीडियो, फोटो, ऑडियो या अन्य कोई इलेक्ट्रॉनिक प्रमाण हैं, तो वे जांच टीम के समक्ष उन्हें प्रस्तुत कर सकते हैं। इसके अलावा प्रत्यक्षदर्शी अपना मौखिक या लिखित बयान भी दर्ज करा सकते हैं। सभी साक्ष्य 15 मई 2026 तक जमा किए जा सकते हैं। साक्ष्य जमा करने के लिए पुलिस लाइन, गौतमबुद्धनगर स्थित पुलिस उपायुक्त लाइन्स कार्यालय में सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक आना होगा।
प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि जांच पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ पूरी हो ताकि घटना के पीछे के वास्तविक कारणों का पता चल सके। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की दोहराव से बचा जा सके। यह कदम समाज में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है।

