जयपुर। राजस्थान के कोटा में सी-सेक्शन के बाद हुई मौतों ने स्वास्थ्य सचिवालय और चिकित्सा विभाग में चर्चा का विषय बना दिया है। जैक्सन लैबोरेटरीज द्वारा निर्मित ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का एक बैच जांच में घटिया पाया गया है, जिसके कारण इस दवा के उपयोग पर राज्यव्यापी प्रतिबंध लगाया गया है। अधिकारियों ने तुरंत इस बैच की बिक्री और उपयोग बंद करने के निर्देश दिए हैं और अस्पतालों, फार्मेसियों से इस स्टॉक को जब्त कर लिया गया है।
राजस्थान की प्रधान सचिव (स्वास्थ्य) गायत्री राठौर ने पुष्टि की है कि फार्मा कंपनी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है। इसके साथ ही यह भी जांच चल रही है कि अस्पताल में भर्ती अन्य गर्भवती महिलाओं को भी यह इंजेक्शन तो नहीं दिया गया था।
हालांकि, चिकित्सा विशेषज्ञों ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन को सीधे मौतों का कारण नहीं माना जाना चाहिए। लोकप्रिय स्त्री रोग विशेषज्ञ रितिका माथुर ने बताया कि इंजेक्शन से सीधे मातृ मृत्यु होने की संभावना बहुत कम है। उन्होंने कहा कि मृतकों में से एक महिला शिरीन को इंजेक्शन नहीं दिया गया था, फिर भी उनकी मौत गुर्दे की विफलता के कारण हुई।
कोटा में पांच महिलाओं के इलाज के दौरान हुई मौतों ने इलाके में स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके बाद अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली की विशेषज्ञ टीम कोटा भेजी गई है ताकि मामले की गहराई से जांच कर सके। टीम का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले यह आवश्यक है कि मरीजों को दी गई दवाओं की पूरी जांच हो।
जांच में पता चला कि ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के उस बैच में आवश्यक सक्रिय तत्व मौजूद नहीं था। यह खबर राज्य औषधि विभाग और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला द्वारा किए गए परीक्षण में इंजेक्शन पूरी तरह से असफल रहा।
प्रशासन ने इस घटिया सूट के इंजेक्शन की सभी खेप को जब्त कर लिया है। जानकारी के अनुसार, कोटा के अस्पतालों में यह इंजेक्शन स्थानीय माध्यम से आपूर्ति किया गया था। अभी यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि यह बैच अन्य अस्पतालों या खुले बाजार तक पहुंचा है या नहीं।
सहायक औषधि नियंत्रक देवेंद्र कुमार गर्ग ने बताया कि राजस्थान मेडिकल हॉल फर्म ने लगभग चार महीनों में लगभग 12,500 महिलाओं को ये इंजेक्शन दिए थे। सोमवार को रिपोर्ट मिलने के बाद बचा हुआ स्टॉक जब्त कर लिया गया है। कोटा मेडिकल कॉलेज से 2,479 इंजेक्शन, जेके लोन अस्पताल से 72 इंजेक्शन जब्त हुए और आपूर्तिकर्ता के पास भी लगभग 950 इंजेक्शन जब्त किए गए।
गर्ग ने साफ किया कि रासायनिक विश्लेषण में ऑक्सीटोसिन का अस्तित्व ना होना ही इस बैच की विफलता का कारण है। उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि इंजेक्शन से सीधे मौत, गुर्दे फेल होना या कोई जटिलता नहीं हो सकती। अभी पूरे मामले की गहन जांच जारी है और स्वास्थ विभाग पूरी सावधानी के साथ आगे कार्रवाई कर रहा है।

