भारतीय तेज गेंदबाजों के चयन में सिर्फ आँकड़ों को देखकर फैसला करना पर्याप्त नहीं होता। मैदान पर एक गेंदबाज के गुण, उसकी लम्बाई, और टीम की आवश्यकता जैसे कई कारक चयन प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। हाल ही में, रणजी ट्रॉफी में अपने प्रदर्शन के आधार पर गंनूर बरार को टीम में चुना गया, जिसके चलते औकिब नबी की अनदेखी पर बहस छिड़ गई है।
इस बात में कोई संदेह नहीं कि दोनों गेंदबाजों की अपनी-अपनी ताकतें और कमजोरियां हैं। औकिब नबी ने अपनी तेज़ी और स्विंग से कई बार बल्लेबाजों को परेशान किया है, जबकि गंनूर बरार अपनी 6 फीट 5 इंच की ऊंचाई के कारण बाउंस के जरिए विपक्ष को दिक्कत में डाल सकते हैं। लंबे समय से भारत को एक ऐसे तेज गेंदबाज की आवश्यकता थी, जो ऊँचाई के चलते बल्लेबाजों के संतुलन को बिगाड़ सके, और इस लिहाज से बरार को प्राथमिकता मिलनी स्वाभाविक है।
भारत के तेज गेंदबाजी विभाग में इशांत शर्मा के जाने के बाद से कोई सचमुच लंबा तेज़ गेंदबाज नजर नहीं आया है, जो बल्ले के संतुलन को अस्थिर कर सके। इस कमी को पूरा करने के उद्देश्य से, चयनकर्ता ऐसे गेंदबाज को तलाश रहे हैं जो सिर्फ गति ही नहीं, बल्कि अलग-अलग उछाल और तकनीकी विविधता भी दे सके। इस संदर्भ में, बरार का शारीरिक प्रोफ़ाइल और खेलने का अंदाज़ इस भूमिका को भरने में उपयोगी माना जा रहा है।
फिर भी, औकिब नबी को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। चयनकर्ताओं की नजर में अभी भी उनकी संभावनाएं जीवित हैं, क्योंकि वह अपनी गेंदबाजी में निरंतरता और विविधता बनाए रखने में सक्षम हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि भविष्य के लिए चयन बोर्ड दोनों खिलाड़ियों पर ध्यान दे रहा है और परिस्थितियों के अनुसार टीम संयोजन करेगा।
इस पूरी प्रक्रिया से यह साफ होता है कि चयनकर्ताओं को केवल रिकॉर्ड या रन-रेटिंग देखने की बजाय टीम की जरूरतों, गेंदबाजी आक्रमण की सामंजस्य और खिलाड़ियों के विशेष गुणों को महत्व देना पड़ता है। इसलिए, रणजी ट्रॉफी के आंकड़ों के अलावा भी कई पैरामीटर मौजूद हैं, जो किसी खिलाड़ी को टीम में जगह दिला सकते हैं।
रनजी ट्रॉफी में प्रदर्शन अनिवार्य रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन तेज गेंदबाजी विभाग में विविधता और सामूहिक ताकत की दृष्टि से गंनूर बरार का चयन समझदार फैसला माना जा रहा है। भविष्य में यह देखने वाली बात होगी कि ये दोनों गेंदबाज अपनी-अपनी जगह बनाकर भारतीय क्रिकेट को कितना लाभ पहुंचाते हैं।

