गाजियाबाद में पैरा एथलीट चिराग त्यागी की हत्या, गोल्ड मेडल विजेता खिलाड़ी का शव साईं उपवन से मिला

Rashtrabaan

    गाजियाबाद। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके 25 वर्षीय पैरा एथलीट चिराग त्यागी की हत्या की खबर खेल जगत और उनके समर्थकों के लिए एक बड़ा सदमा साबित हुई है। हाल ही में बेंगलुरू में आयोजित आठवीं इंडियन ओपन इंटरनेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 400 मीटर दौड़ का स्वर्ण पदक जीतकर घर लौटे चिराग का शव शनिवार को गाजियाबाद के साईं उपवन क्षेत्र से लहूलुहान अवस्था में बरामद हुआ। शुरुआती पुलिस जांच में हत्या की आशंका जुड़े कई तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने इस मामले को और गंभीर बना दिया है।

    हत्या की पुष्टि और प्रारंभिक जांच

    घटना स्थल पर पहुंची पुलिस ने चिराग का शव कब्जे में लिया। मेडिकल जांच में उनके शरीर पर गोली के घाव और चेहरे पर गंभीर चोटों के निशान पाए गए। पुलिस ने बताया कि चिराग की पीठ में गोली लगाई गई थी और पुलिस जांच के मुताबिक, उनकी पहचान छिपाने के लिए चेहरे पर जानलेवा प्रहार किया गया है। घटनास्थल से चिराग का बैग और एक मोबाइल फोन बरामद हुआ है, जबकि दूसरा मोबाइल फोन गायब है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और रिपोर्ट आने के बाद मौत के सही कारणों का खुलासा होगा।

    साथी पैरा एथलीट हिरासत में

    पुलिस ने जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों को जांचते हुए चिराग के साथी पैरा एथलीट यश खटीक को हिरासत में लिया है। पूछताछ में पता चला कि दोनों ब्लाइंड श्रेणी के खिलाड़ी थे और हाल ही में चिराग ने यश के खिलाफ खेल दस्तावेजों की सत्यता को लेकर शिकायत की थी, जिसके बाद यश का क्वालिफिकेशन रद्द कर दिया गया था। पुलिस मानती है कि इसी रंजिश को लेकर हत्या की साजिश रची गई। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस हत्या में प्रयुक्त हथियार भी खोज रही है।

    परिवार में मातम, जश्न में बदली खबर

    चिराग के परिवार में उनकी वापसी का उत्साह था और स्वर्ण पदक जीतने के कारण जश्न की तैयारियां चल रही थीं। उनके चाचा के अनुसार, जब भी चिराग पदक जीतकर लौटते थे, परिवार के लोग केक काटकर उनका स्वागत करते थे। लेकिन उसी समय हत्या की खबर ने पूरे परिवार सहित गांव को सदमे में डाल दिया। उनकी मां निशा देवी और 70 वर्षीय दादी शीला देवी की स्थिति नाजुक है। रिश्तेदार और गांव वाले उनकी मौत से स्तब्ध हैं।

    संघर्ष की कहानी

    मुरादनगर के वसंतपुर सैथली गांव के निवासी चिराग त्यागी बचपन से दृष्टिबाधित थे, लेकिन उन्होंने अपनी कमजोरी को कभी अपनी पहचान नहीं बनने दिया। परिवार के सहयोग और अपनी मेहनत से उन्होंने पैरा एथलेटिक्स में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीते। दो साल पहले एक अभ्यास के दौरान पैर में गंभीर चोट लगी थी, लेकिन कठिन संघर्ष के बाद वे ट्रैक पर वापसी करने में सफल रहे। उनके चचेरे भाई अंकुर त्यागी ने बताया कि कठिनाइयों के बीच भी चिराग ने आत्मविश्वास खोया नहीं।

    एशियन पैरा गेम्स का बड़ा आस

    पैरा पावरलिफ्टिंग के चेयरमैन जीपी सिंह ने चिराग की हत्या पर गहरा दुःख जताया। उन्होंने कहा कि चिराग देश के सबसे प्रतिभाशाली पैरा एथलीटों में से थे और आगामी एशियन पैरा गेम्स में पदक जीतने की संभावना थी। तेंदुकारों की तरह उनकी टी-12 श्रेणी में रैंकिंग लगातार सुधर रही थी। हाल ही में उन्होंने बेंगलुरू में 400 मीटर की दौड़ 49.69 सेकंड में पूरी की थी, जो उनके उज्ज्वल भविष्य का संकेत था।

    पहचान महिला मित्र के फोन से हुई

    चिराग की पहचान एक महिला मित्र के फोन कॉल के जरिए हुई। पुलिस के अनुसार, इंदौर की युवती शनिवार सुबह गाजियाबाद पहुंची, जो चिराग से लगातार संपर्क करने की कोशिश कर रही थी। जब पुलिस ने चिराग का मोबाइल उठाया, तो उसकी कॉल आई। युवती ने बताया कि वे इंस्टाग्राम के माध्यम से मिले थे और नियमित रूप से बातचीत करते थे। वह बेंगलुरू में हुई प्रतियोगिता के दौरान उनसे मिली थी और गाजियाबाद में मिलने की योजना बना रही थी।

    पुलिस की जांच जारी

    जांच में सामने आया है कि बेंगलुरू से दिल्ली आने के बाद चिराग मेट्रो से शहीद स्थल स्टेशन पहुंचे थे, जहां से वह एक परिचित के साथ साईं उपवन क्षेत्र गए थे। पुलिस ने घटनास्थल पर संघर्ष के भी संकेत पाए हैं, जिससे पता चलता है कि हत्या से पहले हाथापाई हुई होगी। चिराग के पिता मनोज त्यागी की शिकायत पर हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक जांच और आरोपी से पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। देश के उभरते प्रतिभाशाली पैरा एथलीट की दुखद और असमय मौत ने खेल जगत को गहरे शोक में डुबो दिया है।

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