डोनाल्ड ट्रम्प का हिंदी महासागर के इस खास द्वीप पर नजर, भारत के बेहद करीब, सीधे खरीद की तैयारी

Rashtrabaan

    अमेरिका दुनिया में अपनी सैन्य और राजनैतिक पहुँच को और मजबूत करने की योजना में जुटा है। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हिंद महासागर में स्थित एक महत्वपूर्ण द्वीप समूह पर अपनी नजर गड़ा दी है। इस द्वीप समूह का नाम चागोस है, जो भारत से लगभग 1600 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ट्रम्प प्रशासन इस द्वीप समूह को सीधे खरीदने की योजना बना रहा है और इसके लिए बड़ी रकम खर्च करने को तैयार है। आइए जानते हैं इस मामले की पूरी जानकारी।

    चागोस द्वीप समूह हिंद महासागर के मध्य में स्थित है और इसमें सबसे प्रमुख द्वीप डिएगो गार्सिया है। डिएगो गार्सिया पर संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्रिटेन का एक महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा है। यह अड्डा अमेरिका को पश्चिम एशिया, अफ्रीका और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सामरिक नियंत्रण और प्रभाव बढ़ाने में अति महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस कारण अमेरिका इसे अपने नियंत्रण में रखना चाहता है।

    डिएगो गार्सिया का सामरिक महत्व

    डिएगो गार्सिया का अमेरिकी नौसेना और वायु सेना के लिए विशेष महत्व है। यह基地 अमेरिकी बी-2 स्टेल्थ बॉम्बर्स के लिए एक रणनीतिक लॉन्चिंग पॉइन्ट है, जिससे वे आसानी से ईरान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र की निगरानी और सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं। यहाँ से अमेरिकी बलों को सैन्य संचालन में सहायता मिलती है और क्षेत्रीय सुरक्षा बनी रहती है।

    मॉरिशस और ब्रिटेन के बीच विवाद

    चागोस द्वीप समूह पर ब्रिटेन और मॉरिशस के बीच कड़ी राजनीति और विवाद चल रहा है। ब्रिटेन इस द्वीप समूह को अब तक अपने नियंत्रण में रखे हुए हैं, जबकि मॉरिशस इसे अपना क्षेत्र होने का दावा करता है। हाल ही में मॉरिशस ने ब्रिटेन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अदालतों में दावे पेश किए हैं और इसे लेकर एक विवाद जारी है। इस विवाद के बीच ट्रम्प प्रशासन मॉरिशस से सीधे द्वीप समूह खरीदने का प्रयास कर रहा है, ताकि ब्रिटेन की भूमिका शिथिल हो सके।

    चीन और ईरान के प्रभाव से सुरक्षा का खतरा

    अमेरिका को इस क्षेत्र में चीन और ईरान के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंता है। मॉरिशस के चीन और ईरान के साथ अच्छे संबंध हैं, जिससे अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी सैन्य क्षमताओं और नियंत्रण को खोने का खतरा महसूस करता है। यदि मॉरिशस को द्वीप समूह का पूर्ण नियंत्रण मिलता है, तो चीन और ईरान इस दिशा में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए प्रयासरत रहेंगे, जिससे अमेरिका की सैन्य और रणनीतिक योजनाओं को खतरा होगा। इसी वजह से अमेरिका ट्रम्प प्रशासन ने चागोस द्वीप समूह की खरीद में तेज़ी दिखाई है।

    खरीद प्रक्रिया और संभावित आर्थिक सौदा

    अमेरिका ब्रिटेन से चागोस द्वीप समूह को मॉरिशस को सौंपने की प्रक्रिया के बाद सीधे मॉरिशस से इस द्वीप समूह को खरीदना चाहता है। खबरों के अनुसार ट्रम्प प्रशासन लगभग 35 अरब यूरो का प्रस्ताव लेकर आया है, जिसे 99 साल के लीज अनुबंध के तहत मॉरिशस से द्वीप समूह हासिल किया जा सके। हालांकि, राजनयिक सूत्रों के अनुसार मॉरिशस सरकार ने अब तक ट्रम्प प्रशासन से कोई आधिकारिक प्रस्ताव प्राप्त नहीं किया है। लेकिन अमेरिका इस सौदे में तेजी लाने की पूरी कोशिश कर रहा है ताकि क्षेत्रीय नियंत्रण कायम रखा जा सके।

    सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण चागोस द्वीप समूह पर अमेरिका की नजर इस क्षेत्र में अपनी सैन्य क्षमता और प्रभाव बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा है। यह सौदा सफल हुआ तो अमेरिका के लिए हिंद महासागर में अपनी शक्ति और नियंत्रण स्थापित करना और अधिक आसान हो जाएगा।

    Source

    error: Content is protected !!