मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति हाल ही में एक नए विवाद का केंद्र बनी है, जहां कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नसीम खान ने भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) पर नेताओं की खरीद-फरोख्त यानी हॉर्स ट्रेडिंग को बढ़ावा देने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने इसे देश के लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक करार दिया। महाराष्ट्र में राजनीतिक दलों के बीच दबाव, पैसे और धमकियों के जरिए उम्मीदवारों को अपना नामांकन वापस लेने के लिए मजबूर किए जाने का मामला सामने आया है।
नसीम खान ने कहा कि ‘‘भारतीय जनता पार्टी और शिंदे सेना हर जगह हॉर्स ट्रेडिंग में शामिल हैं और यह महाराष्ट्र में एक नया ट्रेंड बन गया है। वे न केवल पैसे का गलत इस्तेमाल करते हैं बल्कि उम्मीदवारों को धमकाकर अपने नॉमिनेशन वापस लेने के लिए मजबूर करते हैं। यह प्रक्रिया लोकतंत्र के मूलभूत सिद्धांतों को नुकसान पहुंचा रही है।’’
कांग्रेस नेता ने भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की प्रशंसा करते हुए उनके योगदान को याद किया और कहा कि भारत ने उनके नेतृत्व में मजबूत और प्रगतिशील देश बनने की गति पकड़ी थी। वहीं, उन्होंने मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के 12 साल के कार्यकाल को कठोर शब्दों में भ्रामक बताते हुए कहा कि इस समय के दौरान देश की अर्थव्यवस्था कमजोर हुई है, महंगाई बढ़ी है और बेरोजगारी का स्तर भी ऊपर गया है।
उन्होंने आगे कहा कि ‘‘जीडीपी को इस तरह दिखाया जा रहा है कि आम लोग गुमराह हो रहे हैं। वास्तविक जीडीपी दर लगभग 2.5 प्रतिशत है, हालांकि सरकार इसे 4 से 4.5 प्रतिशत तक दिखाने का दुस्साहस कर रही है। आर्थिक आंकड़ों के साथ छेड़छाड़ से देश की हालत और भी विकट होती जा रही है।’’
नसीम खान ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और लालू प्रसाद यादव की जेड प्लस सुरक्षा हटाए जाने पर भी शोक व्यक्त किया और इसे ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण’’ करार दिया। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं को दबाने और डराने-धमकाने का प्रयास भारतीय लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत हैं। विपक्षी नेताओं को उचित सुरक्षा प्रदान करने के लिए तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए ताकि लोकतंत्र मज़बूत बना रहे।
इस पूरे मामले से महाराष्ट्र और देश की राजनीति में बढ़ती अनिश्चितता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति खतरा साफ नजर आता है। राजनीतिक दबाव, धनबल और धमकियों के खिलाफ ठोस कदम उठाना लोकतंत्र की मजबूती और पारदर्शिता के लिए जरूरी है। नसीम खान की यह टिप्पणी मौजूदा राजनीतिक माहौल में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की सुरक्षा और सुधार की जरूरत पर जोर देती है।

