पश्चिम बंगाल में घुसपैठ के लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार : रविदास मेहरोत्रा

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    लखनऊ। समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मेहरोत्रा ने पश्चिम बंगाल में घुसपैठ के मुद्दे पर केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि जो भी घुसपैठिए राज्य में प्रवेश कर रहे हैं, उसकी पूरी जिम्मेदारी केंद्र की है, खासकर केंद्रीय गृह मंत्री की। उन्होंने इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए और कहा कि भाजपा सरकार असल मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए इस मामले को हवा दे रही है।

    रविदास मेहरोत्रा ने बताया कि पश्चिम बंगाल में घुसपैठियों को रोकने के लिए जो होल्डिंग प्वाइंट बनाए जा रहे हैं, वे असल समस्या का समाधान नहीं हैं। उनका कहना है कि समस्या की जड़ तक पहुंचकर ठोस कदम उठाने की जरूरत है, न कि सिर्फ दिखावटी कदम उठाने की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को चाहिए कि वे अपने प्रदेश की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

    कर्नाटक की राजनीति पर अपनी राय व्यक्त करते हुए रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि कांग्रेस विधायक दल ने डीके शिवकुमार को अपना नेता निर्वाचित किया है, जो आगामी मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालेंगे। यह निर्णय पार्टी की आंतरिक प्रक्रिया का हिस्सा है और इसे सम्मान की नजर से देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह कदम कर्नाटक की राजनीति में स्थिरता लाने में मदद करेगा।

    नीट परीक्षा और पेपर लीक विवाद पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का स्वागत किया। रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है और किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होना चाहिए ताकि शिक्षा प्रणाली प्रति लोगों का विश्वास बना रहे।

    उन्होंने आगे कहा कि न्यायिक आदेश से स्पष्ट हो गया है कि परीक्षा से जुड़े मामले में जिम्मेदार लोगों की पहचान और उनके खिलाफ उचित कार्रवाई अनिवार्य है। रविदास मेहरोत्रा ने इस कदम को छात्र हित में एक सकारात्मक कदम बताया और कहा कि भविष्य में ऐसी कोई घटना न दोहराई जाए, इसके लिए सभी पक्षों को मिलकर काम करना होगा।

    समाप्त करते हुए उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि वे सामाजिक और राजनीतिक मामलों में जवाबदेही निभाएं और देश के युवाओं तथा सामान्य जनता के हितों को प्राथमिकता दें। उनका मानना है कि केवल आरोप-प्रत्यारोप से काम नहीं चलता, बल्कि ठोस नीतियों और कार्यनीतियों के जरिए ही जनता का विश्वास जीता जा सकता है।

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