प्याज किसानों ने केंद्र से 10,000 करोड़ रुपये के पुनरुद्धार पैकेज और स्थिर निर्यात नीति की मांग की

Rashtrabaan

    महाराष्ट्र स्टेट अनियन ग्रोअर्स फार्मर्स एसोसिएशन के संस्थापक-President भारत दिगोले ने बताया कि प्याज किसानों को वर्षों से भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि यह नुकसान मुख्य रूप से गैर-संगठित निर्यात नीतियों, नकली बीज, भंडारण में हो रहे नुकसान और अन्य कई कारणों से हुआ है।

    देश के प्याज उत्पादक किसान लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेकर उपयुक्त कदम उठाए। भारत दिगोले ने कहा कि निर्यात नीति में निरंतर बदलाव और अनिश्चितता ने किसानों के लिए बाजार को अस्थिर कर दिया है जिससे उनकी आमदनी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इसके अलावा नकली बीजों के कारण उत्पादन की गुणवत्ता भी गिर रही है जो कि किसानों के लिए एक बड़ा झटका है।

    भारत में प्याज की खेती एक महत्वपूर्ण कृषि क्षेत्र है और हजारों किसान इस पर निर्भर हैं।_storage के लिहाज से उचित सुविधाओं का अभाव होने के कारण फसल का बहुत बड़ा हिस्सा खराब हो जाता है। इस नुकसान की भरपाई के लिए किसान सरकार से पुर्नजीवन पैकेज की मांग कर रहे हैं ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो सकें।

    किसानों का यह भी कहना है कि स्थिर और स्पष्ट निर्यात नीति के बिना उन्हें बाजार की अनिश्चितताओं से निपटना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में लंबे अवधि के लिए योजना बनाना और निवेश करना भी संभव नहीं हो पाता है। सरकार को चाहिए कि वह किसानों के साथ परामर्श करके एक स्थिर नीति बनाए जो उनकी फसल की कीमत स्थिर रख सके और निर्यात को प्रोत्साहित करे।

    कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि प्याज किसानों की स्थिति सुधारने के लिए सिर्फ आर्थिक सहायता ही नहीं बल्कि तकनीकी और बुनियादी ढांचे में सुधार की भी आवश्यकता है। आधुनिक बीज, बेहतर भंडारण सुविधाएं और अनुसंधान तथा प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों की उत्पादकता बढ़ा सकते हैं।

    संक्षेप में, प्याज किसानों की लगातार बढ़ती समस्याओं को देखते हुए एक व्यापक और स्थायी समाधान की जरूरत है, जिसमें सरकार, कृषि विशेषज्ञ और किसान मिलकर काम करें। ऐसा करने से न केवल किसानों की स्थिति सुधरेगी बल्कि देश में प्याज की स्थिर आपूर्ति और निर्यात भी सुनिश्चित होगा।

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