जयपुर। राजस्थान में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के खिलाफ प्रदर्शन मामले में पुलिस ने चार आरोपियों पर इनाम घोषित कर मामले को नई दिशा दी है। कुचामन सिटी थाना क्षेत्र में दर्ज इस मुकदमे की जांच तेज कर पुलिस प्रशासन दोषियों को पकड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। वहीं, इस कार्रवाई पर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने सवाल उठाए हैं और लोकतंत्र में असहमति प्रकट करने को अपराध बताने की निंदा की है।
30 मई को कुचामन सिटी के दौरे पर पहुंचे मदन राठौड़ का विरोध आरएलपी के कार्यकर्ताओं ने किया था, जिन्होंने उन्हें काले झंडे दिखाकर विरोध प्रकट किया था। इस दौरान पुलिस ने मौके से कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया था। इसके बाद, विजय सिंह पालाडा और सीआई सतपाल सिंह की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था। अब पुलिस ने चार मुख्य आरोपियों भूराराम, रामनिवास कांटिया, मुकेश सारण और दिनेश कुकना के खिलाफ इनाम की घोषणा की है।
पुलिस ने सुरेंद्रनगर निवासी भूराराम पर 5,000 रुपए का तथा अन्य तीन आरोपियों रामनिवास कांटिया, मुकेश सारण और दिनेश कुकना पर 2,100 रुपए प्रत्येक का इनाम घोषित किया है। इस कदम के पीछे पुलिस का उद्देश्य आरोपियों को जल्द से जल्द पकड़ना और मामले की जांच को निर्णायक बनाना है। कुचामन सिटी के थाना प्रभारियों ने जनता से अपील की है कि यदि किसी के पास आरोपियों के ठिकाने या संपर्क की जानकारी हो तो वह पुलिस को सूचित करें। पुलिस ने यह भी भरोसा दिलाया है कि सूचना देने वालों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
कुचामन सिटी के एसएचओ महावीर प्रसाद ने बताया कि यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक के निर्देशानुसार की गई है और पुलिस पूरी गंभीरता के साथ मामले को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि कानून अपने दायरे में सभी को समान रूप से देखता है और किसी को भी कानून के ऊपर नहीं होने दिया जाएगा।
वहीं, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने इस पूरे प्रकरण पर अपने व्यावहारिक और लोकतांत्रिक नजरिए को व्यक्त करते हुए कहा कि लोकतंत्र में मतभेद होना स्वाभाविक है और इसे अपराध घोषित करना उचित नहीं। उन्होंने कहा कि आरएलपी कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें कोई हिंसा या कानून तोड़ने की बात नहीं है। परंतु सरकार की ओर से आरोपियों पर इनाम घोषित करना समझ से परे है और इससे शांति प्रेमी जनमानस में निराशा व्यक्त होती है।
हनुमान बेनीवाल ने आगाह किया कि इस प्रकार के कड़े कदम राज्य में लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर कर सकते हैं और सरकार को चाहिए कि वह विरोध की आवाजों को समझते हुए समाधान की दिशा में काम करे। उन्होंने कहा, “इनाम का बोर्ड लगाने से समाधान नहीं आएगा बल्कि न्याय और सहिष्णुता के सिद्धांतों की भी अनदेखी होगी।”
इस मामले में अब प्रदेश भर की जनता की नजरें पुलिस और सरकार की ओर टिकी हैं कि कैसे वे इस विवादित स्थिति का हल निकालेंगे और लोकतंत्र की असली भावना को कायम रखेंगे। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और विकास की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है।

