राजस्थान में बेनीवाल ने भाजपा की कड़ी आलोचना की, दी कानूनी कार्यवाही की चेतावनी

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    जयपुर। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौर द्वारा उनके खिलाफ सोशल बहिष्कार के आह्वान की आलोचना की है। उन्होंने इस बयान को गंभीर आपत्तिजनक बताते हुए बताया कि वे उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के कानूनी विशेषज्ञों से परामर्श कर रहे हैं और आवश्यक कानूनी कदम उठाने की तैयारी कर रहे हैं।

    बेनीवाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि भारत का संविधान और कानूनी प्रणाली सामाजिक बहिष्कार जैसी गैरकानूनी प्रथाओं को मंजूरी नहीं देती है। वे खाप पंचायतों के संदर्भ में बताते हैं कि कोर्ट ने सामाजिक बहिष्कार को अमान्य कर दिया है, इसलिए किसी भी राजनीतिक दल या नेता द्वारा इस तरह के आह्वान करना अनुचित और गैरकानूनी है।

    उनका यह भी कहना था कि भाजपा की राज्य सरकार ने सत्ता में आते ही अपने वादों को ताक पर रख दिया है, खासकर पेपर लीक और माफिया विरोधी मुद्दों पर। उन्होंने याद दिलाया कि भाजपा को जनता ने कांग्रेस सरकार की खराब कार्यप्रणाली के खिलाफ वोट दिया था, जिसमें अपराध, भ्रष्टाचार और अन्य सामाजिक कुरीतियों के बढ़ने की चिंता थी। लेकिन वर्तमान सरकार इस समस्या को गंभीरता से नहीं ले रही है, जिससे जनता निराश है।

    हनुमान बेनीवाल ने हाल ही में जैसलमेर में गायों की मौत के मामले पर भाजपा की चुप्पी को भी लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे पर पश्चिमी राजस्थान में व्यापक विरोध प्रदर्शन करते रहे हैं जब भाजपा विपक्ष में थी, लेकिन अब जब पार्टी सत्ता में है, तो इस तरह के मुद्दों पर मौन साधे हुए है।

    बेनीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव प्रचार के दौरान किए गए ‘पेपर लीक माफिया’ के खिलाफ दावे को भी याद दिलाया और कहा कि ढाई वर्षों के कार्यकाल में कोई बड़ा सरगना गिरफ्तार नहीं हुआ, जिससे यह सवाल उठता है कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है या नहीं।

    हालांकि आरएलपी के पास राज विधानसभा में अभी कोई विधायक नहीं है, लेकिन उन्होंने कहा कि पार्टी ने राजस्थान में तीसरी राजनीतिक शक्ति के रूप में अपनी अलग पहचान बना ली है और जनता के मुद्दों को लगातार आवाज़ दे रही है।

    मदन राठौर के सामाजिक बहिष्कार वाले बयान पर पुनः प्रतिक्रिया देते हुए बेनीवाल ने स्पष्ट किया कि वे कानूनी विकल्पों को लेकर उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के शीर्ष वकीलों से सलाह ले रहे हैं और जल्द ही आवश्यक कार्रवाई की संभावना जताई है। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की धमकी या अपमानजनक बयान को वे बर्दाश्त नहीं करेंगे और लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।

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