विदेश मंत्रालय ने हाल ही में नेपाल के काठमांडू मेयर बालेन शाह द्वारा लगाए गए दावों का जवाब दिया है, जिसमें उन्होंने भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद को जटिल बताया था। बालेन शाह ने कहा था कि सीमा से जुड़े कई इलाके दोनों देशों के कब्जे में हैं और इस विवाद के समाधान के लिए यू.के. और चीन की मध्यस्थता जरूरी है। इन दावों पर विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सीमा मुद्दों में तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं हो सकती।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि भारत और नेपाल दोनों देशों के बीच सीमा विवादों को द्विपक्षीय वार्ताओं और संवाद के माध्यम से ही सुलझाया जा सकता है। किसी भी तीसरे देश का मध्यस्थता या हस्तक्षेप इस प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है, जिससे दोनों देशों के बीच की भरोसेमंद संबंधों पर असर पड़ता है।
प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत नेपाल के साथ अपने पुराने सम्बन्धों और सम्मानजनक सहयोग को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। दोनों देशों के बीच सीमा रेखा की स्थिति को लेकर कोई भी गलतफहमी दूर करने के लिए लगातार संवाद जारी है। सीमा क्षेत्र में सीमांकन को लेकर जो भी मुद्दे आते हैं, उन्हें समय-समय पर अधिकारियों के उच्चस्तरीय समूह चर्चा के माध्यम से हल किया जाता है।
विदेश मंत्रालय ने यह कहा कि किसी भी विवाद या आपसी मतभेद को शांति और सौहार्दपूर्ण तरीके से हल करना भारत की नीति है। इसके लिए सभी संबंधित पक्षों के बीच भरोसा और पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है। नेपाल के मेयर द्वारा तीसरे देशों की मध्यस्थता की मांग को पिछले द्विपक्षीय बैठकों में उल्लेख नहीं किया गया था और इसे भ्रामक माना जाता है।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि भारत-नेपाल सीमा विवाद किसी भी बहरी शक्ति के बिना ही बातचीत और समझौते से सुलझेगा। दोनों देशों की जनता और सरकारें मिलकर ही इस मसले का स्थायी समाधान निकाल सकती हैं। यह भी ध्यान देना होगा कि नेपाल भारत का पड़ोसी और सहयोगी देश है, इसलिए सीमा विवादों का समाधान द्विपक्षीय संबंधों के अनुरूप ही होना चाहिए।
अंत में, विदेश मंत्रालय ने सभी संबंधित पक्षों से अपील की कि वे आपसी सम्मान और हितों का ध्यान रखते हुए किसी भी विवाद को बढ़ावा न दें और शांतिपूर्ण संवाद के रास्ते को प्राथमिकता दें। नेपाल के साथ भारत के स्नेहपूर्ण और पारंपरिक संबंधों का आधार ही यथावत बना रहेगा।

