हनुमान बेनीवाल की टिप्पणियों पर भाजपा का कड़ा प्रहार, मदन राठौड़ बोले- अभद्र भाषा लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा

Rashtrabaan

    जयपुर। राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर भाषा और व्यवहार को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। हाल ही में राजस्थान लोकदल (आरएलपी) सांसद हनुमान बेनीवाल द्वारा की गई कुछ टिप्पणियों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने इन टिप्पणियों की निंदा करते हुए इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया और कहा कि इस तरह की अभद्र भाषा राजनीतिक संस्थाओं तथा जनतंत्र के लिए खतरा है।

    मदन राठौड़ ने स्पष्ट किया कि कुछ नेता केवल ध्यान आकर्षित करने तथा अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए अपशब्दों और अशिष्ट भाषा का सहारा ले रहे हैं, जो न केवल राजनीति की गरिमा को कमजोर करता है बल्कि लोकतंत्र की परंपरा के लिए भी हानिकारक है। उन्होंने कहा, “राजनीति में विरोध होना स्वाभाविक है, किन्तु आलोचना का अंदाज ऐसा होना चाहिए जो सभ्यता और मर्यादा में रहे। विपक्ष में रहते हुए भी सम्मान और शालीनता बनाए रखना अनिवार्य है।”

    भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त की है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी ने कहा कि भाषाई मर्यादा हर जनप्रतिनिधि का फर्ज होता है और सार्वजनिक जीवन की गरिमा को बचाए रखना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के खिलाफ दोषमुक्त भाषा का उपयोग न किए जाने का कड़ा विरोध जताया।

    राजस्थान राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अरुण चतुर्वेदी ने इस संदर्भ में कहा कि भारतीय राजनीति की परंपरा सदैव से सम्मानजनक संवाद और स्वस्थ वैचारिक बहस की रही है, लेकिन वर्तमान में कुछ नेता केवल राजनीतिक लाभ के लिए इस सीमा को लांघ रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री के खिलाफ अभद्र भाषा के इस्तेमाल को लोकतांत्रिक संस्कृति के लिए हानिकारक बताया।

    गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने भी इस विवादास्पद बयानबाजी की कड़ी आलोचना की और कहा कि सांसद जैसे उच्च पद पर रहकर भी इस प्रकार की भाषा का प्रयोग करना पद की गरिमा के विपरीत है। उन्होंने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को विरोध करना है तो सुसंस्कृत और उदारता के साथ करना चाहिए।

    भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश दधीच, महासचिव श्रवण सिंह बागड़ी, भूपेंद्र सैनी तथा महासचिव मिथिलेश गौतम ने भी इस मामले में पार्टी की स्पष्ट आपत्ति जताई तथा बताया कि असहमत होना लोकतंत्र का हिस्सा है परन्तु व्यक्तिगत अपशब्द और अभद्रता लोकतांत्रिक शिष्टाचार का उल्लंघन है जो देश की राजनीतिक प्रणाली को कमजोर करती है।

    उन्होंने कहा कि जनता ऐसी राजनीति से ऊब चुकी है जिसमें केवल विवाद और आपसी लड़ाईशाही होती है। जनता चाहेती है कि राजनीति विकास, सुशासन और जनकल्याण पर केंद्रित हो, न कि विवादों तथा गुणा-गणित पर आधारित।

    समापन में भाजपा नेताओं ने सभी राजनेताओं से अपील की है कि वे अपने शब्दों और कार्यों पर नियंत्रण रखें, सार्वजनिक मंचों पर सभ्यता और संयम बनाए रखें तथा लोकतंत्र की मूल सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करें। ऐसा करने से ही राजनीतिक प्रतिस्पर्धा स्वस्थ और निर्णायक बनेगी और जनता का विश्वास लोकतांत्रिक संस्थानों में जारी रहेगा।

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