हमारे समय में निसार अहमद जैसे लोग नहीं रहे: रूपा पाई

Rashtrabaan

    कन्नड़ साहित्य की धरोहर को हिंदी पाठकों तक पहुंचाने का उत्तरदायित्व एक चुनौतीपूर्ण कार्य है, जिसे बेंगलुरु की लेखिका रूपा पाई ने बड़ी मेहनत और लगन से पूरा किया है। उन्होंने पुरस्कार विजेता कन्नड़ कवि के 102 कविताओं के संग्रह “Every Day a Celebration” का हिंदी अनुवाद किया है, जो साहित्य प्रेमियों के बीच काफी चर्चा में है।

    रूपा पाई का यह प्रयास भाषा की सीमाओं को पार कर साहित्य की बहुआयामी सुंदरता को समझने और सराहने का एक महत्वपूर्ण कदम है। कविताओं के अनुवाद में उन्होंने न केवल शब्दों का अनुवाद किया है, बल्कि कवि की भावनाओं और संस्कृति की गहराई को भी पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश की है।

    “Every Day a Celebration” नामक इस संग्रह में जीवन की छोटी-छोटी खुशियों, प्रकृति के विविध रंगों, मानव संबंधों और आत्मा की जड़ों को अभिव्यक्त किया गया है। प्रत्येक कविता में एक उत्सव का संदेश छिपा है, जो हमें जीवन के हर क्षण को संजोने के लिए प्रेरित करता है।

    रूपा पाई ने बताया कि अनुवाद करते समय उन्हें यह बात सबसे अधिक प्रभावित करती रही कि कवि ने अपनी मातृभाषा कन्नड़ में कितनी सहजता और गहराई से उन भावनाओं को लिखा है, जिन्हें हिंदी में व्यक्त करना चुनौतीपूर्ण था। उन्होंने इसे एक सांस्कृतिक सेतु बनाने वाला काम बताया, जो विभिन्न भाषाई समुदायों को जोड़ने में मदद करता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस अनुवाद ने कन्नड़ साहित्य के खजाने को हिंदी साहित्य के पाठकों के लिए और अधिक सुलभ बना दिया है। इससे दोनों भाषाओं के बीच संवाद की संभावनाएं बढ़ेंगी और विभिन्न भारतीय भाषाओं के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहन मिलेगा।

    रूपा पाई पहले भी कई साहित्यिक कृतियों के अनुवाद कर चुकी हैं, जिनमें खासतौर पर बच्चों और युवा वर्ग के लिए रचनाएं शामिल हैं। उनका यह नया अनुवाद लेखन और अनुवाद के क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता को और मजबूती प्रदान करता है।

    अंततः, “Every Day a Celebration” का हिंदी संस्करण भारतीय साहित्य के विविध रंगों को समृद्ध करता है और पाठकों को नए अंदाज में कविता की दुनिया का अनुभव कराता है। ऐसे प्रयासों से ही हमारी भाषाई विरासत जीवित रहती है और आगे बढ़ती है।

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