राजस्थान हाईकोर्ट ने पॉक्सो मामले में आरोपी को सशर्त जमानत दी, सोशल मीडिया उपयोग पर एक साल प्रतिबंध

Rashtrabaan

    जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़की के यौन उत्पीड़न के एक गंभीर मामले में आरोपी को सशर्त जमानत प्रदान की है। कोर्ट ने आरोपी को इंस्टाग्राम, फेसबुक और स्नैपचैट जैसे सभी प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वर्ष तक उपयोग करने से प्रतिबंधित कर दिया है। यह निर्णय पीड़िता की सुरक्षा और समाज की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

    जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकल-न्यायाधीश वाली जोधपुर बेंच ने बीकानेर के मुक्ता प्रसाद नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज इस मामले की जमानत याचिका स्वीकार की है। आरोपी पर भारतीय दंड संहिता की धारा 78(2) और 79 तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 11 और 12 के तहत आरोप लगे हैं।

    कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक साल की अवधि में आरोपी किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल न तो अपने नाम से कर सकता है और न ही किसी काल्पनिक नाम या आईडी के माध्यम से। अगर इस शर्त का उल्लंघन पाया गया तो उसकी जमानत रद्द कर दी जाएगी। साथ ही आरोपी को पीड़िता एवं उसके परिवार के सदस्यों से किसी भी रूप में संपर्क करने से भी प्रतिबंधित किया गया है।

    अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता के पिता द्वारा 22 फरवरी को एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि आरोपी ने फरवरी के प्रथम 20 दिनों में यौन उत्पीड़न, पीछा करने और साइबर अपराध किए थे। आरोपी को 24 फरवरी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया था और उसके खिलाफ उचित आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है।

    सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने आरोपों को असंगत बताते हुए कहा कि मौखिक आरोपों के अलावा कोई ठोस प्रमाण या सामग्री प्रस्तुत नहीं की गई है। इसके अलावा, जांच पूरी हो चुकी है इसलिए आरोपी की हिरासत में रखने का कोई औचित्य नहीं है और वह फरार होने का खतरा नहीं है।

    वहीं, शिकायतकर्ता के वकील तथा लोक अभियोजक ने दलील दी कि आरोपी पीड़िता को मानसिक रूप से परेशान कर रहा था, जिससे उसकी सुरक्षा एवं मानसिक स्थिति प्रभावित हुई है।

    अदालत ने पक्षों की बात सुनने के बाद आरोपी को जमानत देते हुए 50,000 रुपए के निजी मुचलके और दो जमानतदारों की मांग की जो बराबर की राशि के हों। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि आरोपी ट्रायल कोर्ट की सुनवाई के दौरान नियमित रूप से उपस्थित रहे और जमानत की सभी शर्तों का पालन करे।

    सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के अलावा आरोपी को आदेश के तहत गवाहों को प्रभावित न करने, सबूतों से छेड़छाड़ न करने और किसी भी आपराधिक गतिविधि में शामिल न होने की कड़ी चेतावनी दी गई है। राजस्थान हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले में कोर्ट और समाज की सुरक्षा को सुनिश्चित करने का प्रयास जारी रखा है ताकि पीड़िता और उसके परिवार को न्याय मिल सके।

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