रायचूर सांसद ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम संशोधनों पर चिंता व्यक्त की

Rashtrabaan

    रायचूर के सांसद श्री नाइक ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि नई नियमावली के भाग III के दायरे का विस्तार ऐसे कदमों की ओर इशारा करता है जो इंटरनेट पर उपयोगकर्ताओं द्वारा बनाई गई समाचार और वर्तमान मामलों की सामग्री को भी एक प्रकाशक-केन्द्रित ढांचे के अंतर्गत लाने का प्रयास कर रहे हैं।

    नाइक ने यह भी बताया कि इस प्रस्तावित संशोधन से केवल पारंपरिक समाचार प्रकाशकों तक सीमित रहने की बजाय, अब आम उपयोगकर्ताओं द्वारा साझा की जाने वाली सूचनाओं और सामग्री पर भी कड़ी निगरानी और नियंत्रण लागू किया जाएगा। इससे इंटरनेट के मूलभूत स्वतंत्रता तत्वों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है और इस प्रकार का नियंत्रण अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए चुनौतियाँ खड़ी कर सकता है।

    उनका मानना है कि यदि सरकार इस दिशा में बिना व्यापक चर्चा और विचार-विमर्श के कदम उठाती है, तो इससे तकनीकी क्षेत्र में नवाचारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और जनता की राय व्यक्त करने की स्वायत्तता सीमित हो जाएगी। उन्होंने सुझाव दिया कि इस प्रकार के संवेदनशील विषयों पर सभी हितधारकों, विशेषज्ञों और नागरिक समाज के साथ व्यापक संवाद और विचार-विमर्श आवश्यक है ताकि नियमावली को संतुलित और न्यायसंगत बनाया जा सके।

    सांसद नाइक ने कहा कि इंटरनेट आज एक ऐसा मंच है जहाँ हर व्यक्ति अपनी आवाज़ उठा सकता है और ज्ञान, सूचना और संवाद का आदान-प्रदान कर सकता है। अगर इसे केवल कुछ चुनिंदा पक्षों के नियन्त्रण में लाया गया तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध होगा। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि वे प्रस्तावित संशोधनों की समीक्षा करते समय बहुआयामी पहलुओं को ध्यान में रखें और साथ ही डिजिटल आज़ादी को बनाए रखने के लिए कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करें।

    यह चिंता इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम डिजिटल दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण नियमावली है, जो देश में इंटरनेट से संबंधित गतिविधियों और सेवाओं को नियंत्रित करती है। इसका प्रभाव व्यापक है, इसलिए इसे तय करते समय सावधानी और समझदारी से काम लेना आवश्यक है।

    अंततः नाइक ने यह भी कहा कि अगर नियमावली में इस प्रकार के परिवर्तन किए जाते हैं, तो इसके दुष्परिणाम समाज के सभी वर्गों पर पड़ेंगे, खासकर उन लोगों पर जो इंटरनेट के माध्यम से अपना व्यवसाय, शिक्षा या सामाजिक संवाद संचालित करते हैं। इसलिए, सरकारी प्राधिकरणों को चाहिए कि वे सुरक्षा और स्वतंत्रता के बीच सही संतुलन स्थापित करें और जनहित को सर्वोपरि रखें।

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