ट्विशा शर्मा मौत मामले में सास गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द, हिरासत में पूछताछ के मार्ग खुले

Rashtrabaan

    जबलपुर: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने ट्विशा शर्मा मौत मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपित पूर्व न्यायिक अधिकारी गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत खारिज कर दी है। यह मामला तब सुर्खियों में आया जब भोपाल की निचली अदालत ने एफआईआर दर्ज होने के कुछ ही घंटों बाद राहत स्वरूप उन्हें अग्रिम जमानत प्रदान कर दी थी, जिसे हाईकोर्ट ने गंभीर टिप्पणियों के साथ रद्द कर दिया।

    जस्टिस देवनारायण मिश्र की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि कानून के समक्ष सभी समान हैं, चाहे उनकी सामाजिक या पदगत स्थिति कुछ भी हो। इस फैसले के साथ ही सीबीआई एवं पुलिस को गिरिबाला सिंह को हिरासत में लेकर पूछताछ करने का रास्ता साफ हो गया है।

    मौत से पहले शरीर पर गंभीर चोटों के निशान

    मामले में ट्विशा के शरीर पर पाए गए छह गंभीर चोटों के निशान पोस्टमार्टम और एम्स द्वारा तैयार की गई स्पेशल रिपोर्ट में सामने आए हैं। चार चोटें बाएं हाथ पर, एक रिंग फिंगर पर तथा एक सिर पर मिली है। एम्स ने साफ किया कि ये चोटें शरीर के फंदे से उतारने या परिवहन के दौरान नहीं, बल्कि मौत से पहले की गई मारपीट या प्रहार का नतीजा हैं। फेफड़ों एवं आंखों की स्थिति ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

    सबूतों में छेड़छाड़ की आशंका

    राज्य सरकार के एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह और सीबीआई ने अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए बताया कि गिरिबाला सिंह जांच एजेंसी के साथ सहयोग नहीं कर रही हैं और पांच बार नोटिस दिए जाने के बावजूद उनका जवाब नहीं मिला। ट्विशा के परिवार के वकील ने अदालत में कहा कि पूर्व जज होने के नाते उनके पास तकनीकी ज्ञान है, जिससे वे कस्टडी के बिना सच उगलवाने में सक्षम नहीं हैं, बल्कि सबूतों में छेड़छाड़ भी कर सकती हैं।

    बचाव पक्ष की चार मुख्य दलीलें और अदालत का रुख

    1. व्हाट्सऐप चैट्स: बचाव पक्ष का दावा था कि प्रताड़ना केवल पति समर्थ सिंह की ओर से थी, न कि सास की। न्यायालय ने इसे गलत ठहराया और कहा कि गवाहों और चैट्स के आधार पर आरोप व्यापक हैं।

    2. बैंक ट्रांजैक्शन: सात लाख रुपये से अधिक की यूपीआई ट्रांसफर को बचाव पक्ष ने दहेज का प्रमाण मानने से इंकार किया। हाईकोर्ट ने पाया कि लेनदेन शादी से पहले और बाद के कुछ महीनों का है, जिससे आरोप खारिज नहीं हो सकते।

    3. जबरन गर्भपात: बचाव में कहा गया कि गर्भपात ट्विशा की मर्जी से हुआ, जबकि अदालत ने विवाद और दबाव की पुष्टि की।

    4. उम्र और पद: उम्र तथा पूर्व पद का हवाला देते हुए फरार होने की संभावना न होने का तर्क नहीं माना गया।

    निचली अदालत के फैसले को खारिज किया गया

    हाईकोर्ट ने निचली अदालत के अग्रिम जमानत के फैसले को गम्भीर कानूनी त्रुटि बताया और इसे रद्द कर दिया। साथ ही मामले की जांच दहेज प्रतिषेध अधिनियम और अन्य संगीन धाराओं के तहत त्वरित व कड़ाई से करने के निर्देश दिए। दिल्ली एम्स के डॉक्टरों की टीम द्वारा सेकंड ऑटोप्सी भी कराई गई है, जिसकी रिपोर्ट का इंतजार है।

    सीबीआई ने बताया कि ट्विशा के पति समर्थ सिंह को पहले ही हिरासत में लिया जा चुका है और अब गिरिबाला सिंह की गिरफ्तारी की भी संभावना हो गई है। मामले की संवेदनशीलता के कारण जांच में कोई कसर नहीं छोड़ने का दावा किया गया है।

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