महोबा में स्थित मां चंडिका देवी मंदिर में ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने हाल ही में पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर उन्होंने गौ माता के सम्मान को लेकर आध्यात्मिक गुरु धीरेंद्र शास्त्री द्वारा निकाली जा रही गौ रैली का पूरे जोर-शोर से समर्थन किया।
शंकराचार्य ने कहा कि यह रैली न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी इसकी अत्यधिक अहमियत है। उन्होंने बताया कि इस रैली में बड़ी संख्या में लोग शामिल हो रहे हैं और यह साबित कर रहा है कि गौ माता का सम्मान पूरे समाज के बीच दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से तीन प्रस्तावित संकल्पों का स्वागत किया, जो सामूहिक रूप से गौ माता के संरक्षण और सम्मान को सुनिश्चित करने के लिए हैं।
उन्होंने कहा, “धीरेंद्र शास्त्री जी जो यह मुद्दा लेकर सामने आए हैं, वह हमारे हृदय से जुड़ा हुआ है। गौ माता को केवल एक पशु समझना गलत होगा, क्योंकि यह पूरे हिन्दू समाज की सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक आस्था का प्रतीक है। हमें इसे ‘राष्ट्र माता’ के रूप में स्वीकार करना चाहिए।”
शंकराचार्य ने यह भी जोर देकर कहा कि समाज का हर वर्ग इस संघर्ष में साथ दे रहा है। “पिछले कुछ समय से गाय को लेकर जितनी बातें हो रही हैं, वह इस बात का सबूत है कि यह मुद्दा केवल धार्मिक नहीं बल्कि राजनीतिक और सामाजिक भी है। भाजपा समेत कई राजनीतिक दल भी अब इस पहल की सही अहमियत समझ रहे हैं, लेकिन कुछ नेताओं की जिद की वजह से इस मुद्दे पर ठहराव है।” उन्होंने सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जब देश का बहुमत गाय को माता मानता है, तो सरकार को इस पहल को आगे बढ़ाने में कोई दिक्कत क्यों हो रही है।
शंकराचार्य का मानना है कि यदि हम गौ माता को जानवरों की श्रेणी में रखते रहेंगे, तो यह सांस्कृतिक अपमान होगा। उन्होंने कहा, “गौ माता हमारे धार्मिक आदर्शों और सांस्कृतिक सोच का हिस्सा है। उसे माता का दर्जा देकर ही हम उसके प्रति सम्मान और संरक्षण सुनिश्चित कर सकते हैं।”
इस पहल से जुड़ी इस रैली पर उनका समर्थन समाज में एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जो गौ माता के प्रति हर तरफ से बढ़ती जागरूकता को दर्शाता है। शंकराचार्य ने अंत में यह भी कहा कि ऐसी सामूहिक क्रियाएं ही देश के लोगों को जोड़कर एकता के सूत्र में बांधती हैं और इसके लिए हर वर्ग की भागीदारी आवश्यक है।
इस आयोजन ने जहां धार्मिक अनुयायियों को प्रेरित किया है, वहीं सामाजिक संगठनों और आम जनता के बीच भी गौ माता के महत्व को स्थापित करने में मदद की है। शंकराचार्य के समर्थन से यह रैली और भी मजबूत हुई है और मौजूदा समय में यह एक महत्वपूर्ण पर्याय बनकर उभरी है।

