रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में नौसेना के लिए 20 ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) जैमर की खरीद के लिए ₹449 करोड़ के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह अनुबंध ‘खरीद (भारतीय-स्वदेशी रूप से डिज़ाइन, विकसित और निर्मित)’ श्रेणी में किया गया है, जिससे देश में रक्षा उपकरणों के स्वदेशीकरण को बढ़ावा मिलेगा।
GNSS जैमर का मुख्य उद्देश्य शत्रु के सैटेलाइट नेविगेशन और कम्युनिकेशन संकेतों को बाधित करना है, जिससे नौसेना के मिशन को सुरक्षित और प्रभावी बनाया जा सके। ये उपकरण समुद्री संचालन के दौरान संभावित खतरों से निपटने में सहायक होंगे और नौसेना की सामरिक क्षमताओं को बढ़ावा देंगे।
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि यह अनुबंध घरेलू रक्षा उद्योग की क्षमताओं को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। स्वदेशी तकनीक आधारित इस परियोजना से न केवल विदेशी निर्भरता कम होगी बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम जैमर का इस्तेमाल सैटलाइट नेविगेशन प्रणाली जैसे GPS, GLONASS, GALILEO आदि के संकेतों को बाधित करने के लिए किया जाता है। इससे दुश्मन की नेविगेशन क्षमता प्रभावित होती है, जो युद्ध और सुरक्षा रणनीतियों में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
यह निर्णय भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत) नीति के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य स्वदेशी तकनीकी विकास को प्रोत्साहित करना और रक्षा उपकरणों की खरीद में विदेशी उत्पादों पर निर्भरता कम करना है। इससे भारतीय रक्षा उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक बनाने की दिशा में भी मदद मिलेगी।
इस समझौते के तहत निर्मित GNSS जैमर को नौसेना के विभिन्न क्षेत्रीय कमांडों में तैनात किया जाएगा, ताकि सामरिक तौर पर महत्वपूर्ण इलाकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इसके उपयोग से भारतीय नौसेना की निगरानी एवं रक्षा क्षमता बेहतर होगी, जो समुद्री सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के उपकरणों का विकास और स्वदेशी निर्माण भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे को मजबूत बनाने में सहायक होगा। इसका लाभ न केवल वर्तमान रणनीतिक जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए भी तैयार करेगा।
अंत में, यह समझौता देश की सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो तकनीकी तौर पर सक्षम और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने में मदद करेगा। भारतीय उद्योग जगत के लिए भी यह नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा।

