जसपल राणा को याद करते हुए: भाकर की ओलंपिक सफलता के पीछे भारतीय शूटिंग आइकन

Rashtrabaan

    भारतीय शूटिंग समुदाय आज एक महान शिखर को खो चुका है। जसपल राणा, जिनका नाम भारतीय शूटिंग के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा, 49 वर्ष की उम्र में हमारा साथ छोड़ गए हैं। वे केवल एक प्रख्यात एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता नहीं थे, बल्कि कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने भारत का नाम रोशन किया।

    जसपल राणा ने अपने खेल कौशल से न केवल अपनी प्रतिभा का परिचय दिया, बल्कि कोच के रूप में भी उन्होंने भारतीय शूटिंग को कई नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। खासकर उन्होंने युवा निशानेबाज मनु भाकर को मार्गदर्शन दिया, जो 2024 पेरिस ओलंपिक में दो मेडल जीतकर इतिहास रचने में सफल रही। इसकी प्रक्रिया में जसपल राणा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही।

    उनका करियर बहुत ही प्रेरणादायक था और उन्होंने खेल के प्रति समर्पण तथा कड़ी मेहनत का अद्भुत उदाहरण पेश किया। जसपल राणा की कोचिंग शैली में तकनीकी दक्षता के साथ-साथ मानसिक मजबूती भी निहित थी, जो उनके प्रशिक्षुओं को कठिन परिस्थितियों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए तैयार करती थी।

    भारतीय शूटिंग जगत ने उनके योगदान को हमेशा याद रखा है। उनके नेतृत्व में कई युवा खिलाड़ी विश्व पटल पर चमके और उनकी क्षमता का लोहा मनवाया। उनका निधन एक अपूरणीय क्षति है, लेकिन उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनी रहेगी।

    आज जसपल राणा की याद में सदैव उनके अनुयायी और निशानेबाज श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। भारत ने एक महान खिलाड़ी और कोच खोया है, जिन्होंने अपनी मेहनत, समर्पण और विजयी दृष्टिकोण से देश का मान बढ़ाया। उनकी उपलब्धियाँ और प्रशिक्षण की विरासत भारतीय खेल के इतिहास में सदैव जीवित रहेगी।

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