असम के सांस्कृतिक और पारंपरिक उत्पादों को एक बार फिर सम्मान मिला है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बताया कि असम के चार प्रमुख उत्पादों को जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग प्रदान किया गया है। यह टैग न केवल उत्पादों की विशिष्ट पहचान बनाता है, बल्कि स्थानीय कारीगरों और उत्पादकों के लिए आर्थिक एवं सांस्कृतिक सुरक्षा भी सुनिश्चित करता है।
बिहू पापा, जो एक पारंपरिक संगीत वाद्ययंत्र है, ने इस बार GI टैग पाने में सफलता हासिल की है। बिहू पापा असम के लोक संगीत और नृत्य समारोहों का अभिन्न हिस्सा है, जिसकी आवाज़ सुनते ही लोगों के मन में वहां की संस्कृति और धरोहर की याद ताजा हो जाती है।
इसके अलावा, बांस से बने वस्त्र और उत्पाद जिन्हें बह सिल्पा कहा जाता है, को भी GI टैग के अंतर्गत शामिल किया गया है। बांस की कलाकृतियां न केवल पर्यावरण के अनुकूल होती हैं, बल्कि यह असम के शिल्पकारों की कारीगरी और कौशल का प्रमाण भी हैं।
सरकार ने करबी आंगलोंग और देओरी के हथकरघा उत्पादों को भी इस सम्मान से नवाजा है। ये हैंडलूम उत्पाद पारंपरिक तकनीकों और स्थानीय समुदायों की मेहनत का परिणाम हैं, जो उनकी पहचान को वैश्विक स्तर पर पुनः स्थापित करते हैं। GI टैग मिलने से इन उत्पादों को नक़ल से सुरक्षा मिलेगी और उनकी बाजार में मांग बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह के कदम स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहित करते हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार परंपरागत कला और शिल्प को संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है और ऐसे कई और पहल की योजना बनाई जा रही है।
यह उपलब्धि असम के सांस्कृतिक समृद्धि और स्थानीय कारीगरों के लिए गर्व की बात है। GI टैग के ज़रिये इन उत्पादों की वैश्विक पहचान बढ़ेगी, जिससे स्थानीय जनता को रोजगार और सुगम बाजार प्राप्त होगा।
अंततः, यह न सिर्फ एक राज्य की सफलता है बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने वाला एक बड़ा कदम है।

