शिवसेना-UBT में गंभीर दरार: संजय राउत ने ‘ऑपरेशन टाइगर’ के जवाब में किया ‘ऑपरेशन तुड़वा’ का एलान, बागी सांसदों को नोटिस जारी

Rashtrabaan

    सियासत के गलियारों में अहम मोड़ तब आया जब शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने ‘ऑपरेशन टाइगर’ के खिलाफ कड़ा जवाब देते हुए ‘ऑपरेशन तुड़वा’ की घोषणा की। इस ऐलान के साथ ही शिवसेना की अंदरूनी खींचतान और भी तेज हो गई है। राउत ने साफ शब्दों में कहा कि उनका यह अभियान विरोधियों को निशाना बनाने और पार्टी के आंतरिक विरोधी तत्वों को पूरी तरह खत्म करने के लिए है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर पार्टी के कुछ नेताओं को भारी सुरक्षा कवर क्यों दिया जा रहा है, जबकि वे खुद को धमकियों से बचाने का दायित्व नहीं समझते।

    संजय राउत ने आरोप लगाया कि बागी सांसदों को 25-25 करोड़ रुपये दिए गए हैं और उन्हें विशेष सुरक्षा के तहत जयपुर के लीला होटल में रखा गया है। उन्होंने कहा कि यह सुरक्षा इतनी बड़ी है कि ऐसा लगता है जैसे भारतीय फौज को जमीन पर उतारने की तैयारी हो रही हो। उनके अनुसार, यह बढ़ी हुई सुरक्षा केवल डर की निशानी है, जिसका कोई ठोस कारण सामने नहीं आया है। राउत ने चुनौती भरे अंदाज में कहा कि अगर कुछ करने की हिम्मत है तो बिना सुरक्षा घेरे के सामने आकर दिखाएं, और ईडी या सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों की धमक से न घबराएं।

    उद्धव गुट की बैठक में गैरहाजिरी

    वहीं, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट में टूट की खबरें तेजी से फैल रही हैं। हाल ही में संसद भवन में आयोजित शिवसेना की मीटिंग में छह बागी सांसदों ने हाजिरी नहीं लगाई, जो पार्टी के लिए एक गंभीर संकेत माना जा रहा है। मीटिंग में केवल तीन समर्थक सांसद मौजूद रहे, जिनमें अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ बाजे शामिल थे। सांसद अनिल देसाई ने मीडिया को बताया कि बागी सांसदों को जल्द ही कारण बताओ नोटिस भेजा जाएगा।

    कारण बताओ नोटिस और कड़ी कार्रवाई की तैयारी

    संजय राउत ने कहा कि पार्टी की बैठक में अनुपस्थित सांसदों को सात दिनों के भीतर अपना जवाब देना होगा। यदि वे नोटिस का जवाब नहीं देते हैं, तो उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। राउत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह लड़ाई केवल राजनीतिक नहीं, कानूनी और सड़क पर भी जारी रहेगी। उन्होंने यह संकेत दिया कि पार्टी अपने हर कदम पर मजबूत रहेगी और बागियों को सहन नहीं करेगी।

    बागी सांसदों ने बनाया नया संसदीय गुट

    शिवसेना के छह बागी सांसदों ने मिलकर अलग संसदीय गुट बनाने का ऐलान किया है। उन्होंने लोकसभा स्पीकर को भी इसकी सूचना दी है। इस नए समूह में परभणी से संजय जाधव, यवतमाल वाशिम से संजय देशमुख, मुंबई उत्तर-पूर्व से संजय दीना पाटिल, शिरडी से भाऊसाहेब वाकचौरे, हिंगोली से नागेश पाटिल तथा उस्मानाबाद से ओमराजे निंबालकर शामिल हैं। इस कदम ने महाराष्ट्र की राजनीति में नया उबाल ला दिया है, जिसके प्रभाव आने वाले समय में स्पष्ट रूप से दिखाई देंगे।

    यह स्थिति शिवसेना के आंतरिक संघर्ष को गहराती दिख रही है, जिससे पार्टी की राजनीतिक पकड़ पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस विवाद का अंत किस दिशा में होता है और शिवसेना की राजनीति पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।

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