देश की राजनीति में उच्च सदन यानी राज्यसभा का समीकरण लगातार बदल रहा है। हाल ही में संपन्न हुए 27 सीटों के चुनाव ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को नई मजबूती प्रदान की है। भाजपा नेतृत्व वाले इस गठबंधन की बढ़ती ताकत ने संविधान संशोधन जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने की राह को और आसान कर दिया है। नए चुनावों के बाद राज्यसभा में NDA की स्थिति स्पष्ट रूप से मजबूत होती दिख रही है, जिससे इसका राजनीतिक प्रभाव भी बढ़ेगा।
झारखंड में निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवाणी की जीत से NDA का आंकड़ा 153 तक पहुंच गया है, जो गठबंधन को उच्च सदन में रणनीतिक लाभ देता है। वहीं, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के चार सांसदों के इस्तीफे के बाद खाली हुई सीटों पर आगामी चुनाव संभावित रूप से भाजपा गठबंधन के पक्ष में हैं। इससे NDA के कुल सदस्यों की संख्या 157 तक बढ़ने की संभावना है। इस वृद्धि ने उच्च सदन में भाजपा के प्रभाव को और अधिक मजबूत बना दिया है।
संविधान संशोधन के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत
राज्यसभा में संविधान संशोधन के लिए 164 सांसदों की सहमति आवश्यक होती है, जो दो-तिहाई बहुमत का प्रभावी आंकड़ा है। वर्तमान में NDA 157 सदस्यीय संख्या तक पहुंच सकता है, जो कि इस आंकड़े से केवल सात सीटें कम है। यह कमी राजनीतिक समझौतों और समर्थन हासिल करने के जरिए आसानी से पूरी की जा सकती है, जिससे सरकार के संवैधानिक सुधारों को मंजूरी मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
NDA के सदस्यों की स्थिति
वर्तमान NDA गठबंधन के पास कुल 153 सांसद हैं, जिनमें से भारतीय जनता पार्टी के 115 सदस्य सबसे बड़ी संख्या हैं। इसके अलावा तेलुगु देशम पार्टी, जनता दल यूनाइटेड, AIADMK, और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के चार-चार सदस्यों सहित शिवसेना, असम गण परिषद, राष्ट्रीय लोक मोर्चा, पट्टाली मक्कल काची, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (A), जनसेना, नेशनल पीपुल्स पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के एक-एक प्रतिनिधि भी शामिल हैं। मनोनीत सदस्यों और निर्दलीयों का समर्थन भी NDA को मजबूत बनाता है। पश्चिम बंगाल से बाहर के सहयोग और यूपीपीएल तथा ZPM के सदस्यों का बाहरी समर्थन भी गठबंधन की ताकत बढ़ाता है।
वाईएसआर कांग्रेस और NDA के बीच संभावित सहयोग
आंध्र प्रदेश की वाईएसआर कांग्रेस के चार सांसद यदि भविष्य में NDA के पक्ष में वोटिंग करते हैं, तो यह गठबंधन 161 सदस्यों तक पहुंच सकता है। ऐसे में दो-तिहाई बहुमत से केवल तीन सदस्य कम रहेंगे, जो रणनीतिक गठजोड़ के माध्यम से पाटे जा सकते हैं। यह संभावित सहयोग राज्यसभा में भाजपा गठबंधन की स्थिति को और मजबूती देगा।
विपक्षी गठबंधन INDIA अलायंस की स्थिति
विपक्षी गठबंधन INDIA अलायंस के पास फिलहाल 63 सांसद हैं। इसमें कांग्रेस के 30, तृणमूल कांग्रेस के 9, समाजवादी पार्टी के 4, और विभिन्न क्षेत्रीय दलों के सांसद शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 26 सांसद अन्य दलों या निर्दलीय के रूप में हैं, जो न तो NDA और न INDIA गठबंधन से जुड़े हैं। ये दल राज्यसभा में राजनीतिक समीकरण को जटिल बनाते हैं और विधायी कार्यवाही में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
दो-तिहाई बहुमत के लिए NDA की रणनीतियां
NDA के सामने दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के लिए कई विकल्प मौजूद हैं। भाजपा के पास विपक्ष या अन्य दलों के कुछ सांसदों को अपने पक्ष में आकर्षित करने का मौका है। इसके अलावा उनके पास वोटिंग के दौरान कुछ सदस्यों के वॉकआउट के विकल्प भी हैं, जिससे बहुमत के आंकड़े को पूरा किया जा सकता है। ऐसी परिस्थिति में सरकार संवैधानिक सुधार और कई अहम विधेयकों को बिना बड़ी अड़चन के पारित करा सकती है, जिससे उनके राजनीतिक एजेंडे को मजबूती मिलेगी।

