लखनऊ। समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मेहरोत्रा ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है और कई मुद्दों को उठाते हुए केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ‘विद्वेषपूर्ण राजनीति’ में लिप्त है और राम मंदिर के दान-पत्र चोरी मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है।
मेहरोत्रा ने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के बागी विधायकों द्वारा पार्टी के बैंक खातों की जांच के विवाद को भाजपा की राजनीति का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा विपक्षी दलों को तोड़ने और कमजोर करने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। भाजपा की यह रणनीति विपक्ष को बिखेरने और उन्हें दबाने की है।
उन्होंने कहा, “बीजेपी लगातार सीबीआई, ईडी व आयकर जैसे एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को दबाने के लिए कर रही है। इससे एक तरह का अघोषित आपातकाल सा माहौल बन गया है जहाँ तानाशाही के संकेत दिख रहे हैं।”
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता के पाकिस्तान पर दिये गए बयान पर मेहरोत्रा ने कहा कि भारत की सेना ने आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की है, लेकिन केंद्र सरकार कमजोर पड़ गई है। उन्होंने कहा कि तानाशाही व कमजोर प्रशासन के चलते देश की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
दिल्ली हाईकोर्ट के टेलीग्राम मामले में लिए फैसले का सम्मान करते हुए मेहरोत्रा ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता की बात कही और सबको अदालतों के निर्णयों का सम्मान करने की अपील की।
सपा द्वारा आयोजित ब्राह्मण सम्मेलन पर चर्चा करते हुए मेहरोत्रा ने कहा कि समाजवादी पार्टी हर धर्म और जाति का सम्मान करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ब्राह्मण समाज का अपमान कर रही है, जिसके कारण समाज में भाजपा के खिलाफ असंतोष बढ़ रहा है। सपा ब्राह्मण समाज के संगठित संघर्ष के लिए प्रतिबद्ध है।
राम मंदिर के दान-पत्र चोरी की घटना पर रविदास मेहरोत्रा ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मंदिर परिसर में चोरी और गड़बड़ी की घटनाएं पिछले समय से हो रही थीं और सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए गए थे। उन्होंने कहा कि अभी तक इस मामले में उचित एफआईआर दर्ज नहीं की गई और कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग को दोहराया और साथ ही कहा कि भाजपा आरोप लगाकर जनता का ध्यान भटकाना चाहती है।
मेहरोत्रा ने कहा, “राम मंदिर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद बने ट्रस्ट के जरिए बन रहा है, भाजपा को इसका श्रेय नहीं लेना चाहिए। जो भी अनियमितताएं सामने आई हैं, उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।”
यह स्पष्ट है कि समाजवादी पार्टी भाजपा सरकार की नीतियों और कार्यशैली पर लगातार सवाल उठा रही है और एक पारदर्शी तथा न्यायसंगत व्यवस्था की मांग कर रही है। विपक्षी दलों के खिलाफ जांच करने और विवादित मामलों पर खुलासा करने की प्रक्रिया तभी विश्वसनीय होगी जब वह निष्पक्ष और स्वतंत्र होगी।

