असम में इस बार 85 प्रतिशत मतदान हुआ, जो राज्य और इसके पड़ोसी क्षेत्रों में पारंपरिक उच्च मतदान प्रतिशत के अनुरूप है। इस उच्च मतदान प्रतिशत ने पूर्वोत्तर भारत के लोकतांत्रिक उत्साह को फिर से साबित किया है।
पूर्वोत्तर भारत की राजनीतिक परिपाटी में मतदान का उच्च प्रतिशत एक विशिष्टता रही है। असम, मणिपुर, नागालैंड और मिजोराम जैसे राज्यों में जनता की मतदान में सक्रिय भागीदारी देखी जाती है। इस बार की विधानसभा चुनाव में भी असम ने इस परंपरा को जारी रखा। 85 प्रतिशत की भागीदारी न केवल लोकतंत्र की मजबूती का परिचायक है, बल्कि यह इस क्षेत्र की सामाजिक और राजनीतिक जागरूकता को भी दर्शाता है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की भागीदारी, चुनावी प्रक्रिया की दृढ़ता को सुनिश्चित करती है और सरकार को जनता की सच्ची भावना का प्रतिनिधित्व करने में सक्षम बनाती है। असम में विभिन्न जनजातीय, जातीय और सांस्कृतिक समूहों की विविधता होने के बावजूद, मतदान में इतनी भारी भागीदारी राजनीतिक स्थिरता के लिए सकारात्मक संकेत है।
इसके साथ ही, चुनाव आयोग की ओर से व्यापक जागरूकता अभियान, आसान मतदान प्रक्रिया, और सुरक्षा के सुदृढ़ इंतजामों ने भी इस बढ़ते मतदान प्रतिशत में अहम भूमिका निभाई है। लोकसभा जैसे महत्वपूर्ण चुनावों में मतदान प्रतिशत कम होने की स्थिति में, असम और पूर्वोत्तर राज्यों का यह शानदार प्रदर्शन समूचे देश के लिए एक मिसाल कही जा सकती है।
इस क्षेत्र की जनता ने न केवल अपनी ड्यूटी निभाई, बल्कि लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता भी जाहिर की। भविष्य में भी इस परंपरा को कायम रखने के लिए सरकार और संबंधित संस्थाओं को सक्रिय होना आवश्यक होगा ताकि सभी वर्गों एवं समुदायों के लोग चुनाव प्रक्रिया में सहज एवं उत्साहपूर्वक भाग ले सकें।
अंततः, असम की यह 85 प्रतिशत मतदान दर पूर्वोत्तर भारत में राजनीतिक स्वस्थता और जनसहभागिता का प्रतीक है, जो क्षेत्र की सामाजिक एकता एवं विकास के लिए भी अनुकूल संदेश है।

