राम मंदिर दान-चढ़ावा चोरी मामले में कांग्रेस की मांग: पीएम मोदी करें हस्तक्षेप, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच हो, ट्रस्ट भंग किया जाए

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    अयोध्या में राम मंदिर दान-चढ़ावा चोरी मामले ने राजनीतिक और सामाजिक रूप से तीव्र प्रतिक्रिया उत्पन्न कर दी है। इस मामले में अब तक आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और एफआईआर भी दर्ज की गई है, जिससे मामला और गंभीर हो गया है। इस प्रकरण ने देश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को झकझोर दिया है और सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर किसकी मिलीभगत से इस मंदिर के दान-चढ़ावे की चोरी संभव हो पाई।

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सदस्य राजीव शुक्ला ने कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए इस मुद्दे पर पार्टी का पक्ष स्पष्ट किया। शुक्ला ने कहा कि कांग्रेस ने पहले इस मामले पर चुप्पी साधे रखी थी क्योंकि धार्मिक विषयों को राजनीतिकरण नहीं करना था, लेकिन अब जब एफआईआर और गिरफ्तारी हो चुकी है, तो इस मामले को नजरंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि विदेश से भी मंदिर में हुई चोरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं, जिससे पूरे देश के श्रद्धालु चिंतित हैं।

    राजीव शुक्ला ने कहा कि मंदिर के लिए गांव-गांव से चंदा इकट्ठा किया गया, जिसमें आम आदमी से लेकर बड़े स्तर तक के लोगों ने दान किया। उन्होंने पूछा कि क्या यह संभव है कि करोड़ों रुपयों की चोरी बिना उच्च अधिकारियों की मिलीभगत के हो गई हो? उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या केवल कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराना उचित होगा, जबकि बड़े नेताओं की कोई जिम्मेदारी तय नहीं की जा रही है।

    कांग्रेस का सख्त रवैया: राम मंदिर चोरों को मिले सख्त सजा

    राजीव शुक्ला ने भाजपा के चुनावी नारे ‘जो राम को लाये हैं, उन्हें सत्ता में लाएं’ को याद करते हुए पूछा कि अब जिन्होंने राम मंदिर के दान को लूटा है, उनकी क्या सजा होगी? उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार में शामिल सभी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और इस घोटाले से प्रभावित जनता को न्याय मिलना चाहिए। कांग्रेस ने इस बात पर भी चिंता जताई कि आभूषण और जेवरात जैसी कीमती चीज़ों का कोई रिकॉर्ड तक उपलब्ध नहीं है, जो इस चोरी की गंभीरता को दर्शाता है।

    भाजपा के मंदिर प्रकोष्ठ पर कांग्रेस का आरोप

    शुक्ला ने भाजपा के मंदिर प्रकोष्ठ की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि देश में शिक्षा, दलित जैसे प्रकोष्ठ तो होते हैं, लेकिन मंदिर प्रकोष्ठ का होना संकेत देता है कि यह एक सुनियोजित कदम है। उनका मानना है कि भाजपा के लोग ट्रस्ट पर कब्ज़ा करके मंदिरों से चंदा जुटाते हैं और उसका राजनीतिक इस्तेमाल करते हैं। यही वजह है कि कांग्रेस इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग कर रही है।

    सुप्रीम कोर्ट के निगरानी में जांच और पीएम मोदी से हस्तक्षेप की मांग

    राजीव शुक्ला ने कहा कि यह मामला देश के लिए अत्यंत गंभीर है और इसका राजनेतिकरण नहीं होना चाहिए। कांग्रेस की मांग है कि इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो और राम मंदिर ट्रस्ट को तत्काल भंग किया जाए। इसके स्थान पर एक नई धार्मिक समिति बनाई जाए जिसमें साधु-संत और धर्माचार्य शामिल हों। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीति एवं भाजपा के अधिकारियों को मंदिर प्रबंधन से दूर रखा जाना चाहिए।

    शुक्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस मामले में शीघ्र हस्तक्षेप करने और कड़े कदम उठाने की अपील की, क्योंकि मंदिर का आयोजन और प्राण प्रतिष्ठा उनका भी निजी और भावनात्मक मामला है। उन्होंने कहा कि देश के लाखों श्रद्धालुओं की आस्था की रक्षा उनकी भी जिम्मेदारी है।

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