मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण दिवस की तैयारी है, जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान और जनसहभागिता आधारित अभिनव पहल “सुमन पंचायत” का शुभारंभ करेंगे। यह कार्यक्रम प्रदेश के बच्चों के संपूर्ण स्वास्थ्य और मातृ शिशु सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। साथ ही स्टेट एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस 2.0 एक्शन प्लान का भी विमोचन किया जाएगा, जो दवाओं के अनुचित उपयोग को रोकने तथा संक्रमण नियंत्रण में अहम भूमिका निभाएगा।
राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के तहत प्रदेश के शून्य से पांच वर्ष तक के लगभग 1.07 करोड़ बच्चे पोलियो की दवा पिंडकृत होंगे। इस महाअभियान में 83 हजार से अधिक पोलियो बूथ, लगभग 1.66 लाख वैक्सीनेटर्स तथा 26 हजार सुपरवाइज़र तैनात किए जाएंगे। अभियान के दौरान 29 और 30 जून को विशेष रूप से घर-घर जाकर छूटे हुए बच्चों को भी पोलियो की खुराक पिलाई जाएगी। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, एयरपोर्ट जैसे सार्वजनिक स्थानों पर भी 3800 ट्रांजिट बूथ और प्रवासी एवं उच्च जोखिम वाले इलाकों में 1400 विशेष मोबाइल टीमें सक्रिय रहेंगी।
साथ ही, “सुमन पंचायत” योजना की शुरुआत की जाएगी, जिसका मुख्य उद्देश्य मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करना तथा सुरक्षित मातृत्व को प्रोत्साहित करना है। इस योजना के तहत उन पंचायतों को जहां एक वर्ष में मातृ मृत्यु, 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु, खसरा और रूबेला के मामले नहीं आते, उनको 1 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। यह पहल संस्थागत प्रसव, नियमित टीकाकरण, पोषण और उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं की समय पर पहचान को बढ़ावा देगी।
स्टेट एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस 2.0 एक्शन प्लान के तहत दवाओं का विवेकपूर्ण उपयोग, संक्रमण नियंत्रण, प्रयोगशाला क्षमताओं का सुदृढ़िकरण, जन-जागरूकता और बहु-विभागीय समन्वय को प्राथमिकता दी जाएगी। यह योजना राष्ट्रीय स्तर की रणनीति के अनुरूप है और “वन हेल्थ” दृष्टिकोण को अपनाते हुए संक्रमणों से बचाव और इलाज की गुणवत्ता को बढ़ाने में सहायक होगी।
इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उन जिलों को भी सम्मानित करेंगे जिन्होंने HPV टीकाकरण अभियान और स्वस्थ यकृत मिशन में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। HPV टीकाकरण के तहत लगभग 8.03 लाख किशोरियों को लक्ष्यित करते हुए अब तक 96% से अधिक टीकाकरण संपन्न हो चुका है। स्वस्थ यकृत मिशन में प्रदेश के 149.26 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग कर यकृत रोगों की समय पर पहचान और उपचार को सुनिश्चित किया गया है।
प्रदेश में यह व्यापक कार्यक्रम स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने, बच्चे और माताओं को सुरक्षित रखने तथा दवाओं के सही उपयोग से संक्रमण को नियंत्रण करने के लिए संकल्पित प्रयासों का परिणाम है। जनभागीदारी और जागरूकता के जरिए इस अभियान से एक स्वस्थ और समृद्ध मध्यप्रदेश का निर्माण संभव होगा।

