श्रीलंका में हाल ही में डेंगू बुखार के मामलों में भारी वृद्धि देखी जा रही है, जिसके कारण अस्पतालों पर भारी दबाव बन गया है। इस बीमारी से निपटने के लिए देश की सेना भी मोर्चे पर आ गई है और ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल कर मॉस्किटो नियंत्रण अभियान तेज कर दिया गया है।
डेंगू बुखार जो मच्छरों के काटने से फैलता है, वह इस बार बहुत तेजी से फैल रहा है और स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी बोझ डाल रहा है। ऐसे समय में जब देश पहले ही ईंधन आपूर्ति संकट और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है, यह संक्रमण स्थिति और भी गंभीर हो गई है।
सेना द्वारा प्रयोग किए जा रहे ड्रोन, मच्छर के प्रजनन स्थलों की पहचान करने और उन्हें मरहम पट्टी करने में मदद कर रहे हैं। ये ड्रोन उन क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करते हैं जहाँ पानी जमा हो सकता है और मच्छर प्रजनन के लिए उपयुक्त माहौल होता है। इससे कीट नाशक या अन्य उपायों को प्रभावी ढंग से फैलाना संभव हो पाता है, जिससे मच्छर जनसंख्या को नियंत्रित किया जा सके।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक से मच्छरों के प्रसार को कम करने में मदद मिलेगी, जिससे डेंगू संक्रमण के मामलों को न्यूनतम किया जा सकेगा। इसके अलावा, सरकार ने जनता को भी सावधानी बरतने और साफ-सफाई रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि संक्रमित मच्छरों को पनपने से रोका जा सके।
इस अभियान के तहत कई नगर निगम क्षेत्रों में साफ-सफाई और कीट नियंत्रण के उपाय शुरू कर दिए गए हैं। साथ ही, स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग जनता के बीच जागरूकता बढ़ाने में लगे हुए हैं।
अंतरराष्ट्रीय और घरेलू विशेषज्ञ इस प्रयास की प्रशंसा कर रहे हैं, क्योंकि इस तरह की टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से पारंपरिक और समय लेने वाले तरीकों की तुलना में तेजी से परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। आगे भी सरकार ऐसे उपाय अपनाने की योजना बना रही है ताकि स्वास्थ्य संकट को नियंत्रित किया जा सके।
डेंगू के साथ-साथ देश ऊर्जा संकट के कारण पहले से ही आर्थिक और सामाजिक दबाव में है, लेकिन इससे निपटने के लिए सैन्य और तकनीकी संसाधनों का संयुक्त प्रयास एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। आशा की जा रही है कि ड्रोन आधारित कीट नियंत्रण विधि और स्वास्थ्य जागरूकता के माध्यम से इस महामारी पर प्रभावी काबू पाया जा सकेगा।

