केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी की पालीहाउस सब्सिडी पर कांग्रेस का हितों के टकराव को लेकर विवाद

Rashtrabaan

    जयपुर : केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी के पालीहाउस परियोजना पर मिली सरकारी सब्सिडी को लेकर राजनीतिक विवाद जोर पकड़ रहा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मंत्री ने अपने मंत्रालय के अधीन चल रही योजना का लाभ उठाकर हितों के टकराव की स्थिति पैदा की है, जो प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए गलत संकेत है। वहीं केंद्रीय मंत्री ने इन्हें पूरी तरह अस्वीकार करते हुए कहा है कि उन्होंने एक किसान के रूप में सभी नियमों का सख्ती से पालन किया है और सब्सिडी उन्हें नियमों के मुताबिक मिली है।

    मामले का मूल और विवाद की वजह

    यह विवाद राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के पीह गांव में भागीरथ चौधरी की पालीहाउस परियोजना को लेकर उठा है। यह योजना राष्ट्रीय हॉर्टिकल्चर बोर्ड (NHB) के अंतर्गत आती है, जो कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। परियोजना की कुल लागत करीब 1.99 करोड़ रुपये है, जिसमें से लगभग 99.60 लाख रुपये की सब्सिडी NHB द्वारा मंजूर की गई। उपरोक्त वित्तीय सहायता पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं कि क्या यह सब्सिडी निष्पक्ष और नियमों के अनुरूप प्रदान की गई है।

    कांग्रेस का आरोप: हितों का टकराव

    राष्ट्रीय कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने मंत्री भागीरथ चौधरी पर आरोप लगाया है कि वे स्वयं NHB के उपाध्यक्ष हैं और उसी बोर्ड की योजना का लाभ लेना प्रशासनिक निष्पक्षता के विरुद्ध है। कांग्रेस ने बताया कि इस मामले की स्वतंत्र जांच आवश्यक है ताकि स्पष्ट हो सके कि सब्सिडी मंजूरी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के अनुसार हुई है या नहीं। साथ ही कांग्रेस ने यह भी तर्क दिया कि सामान्य किसान सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए लंबा इंतजार करते हैं, वहीं एक मंत्री को इतनी बड़ी सब्सिडी मिलना सार्वजनिक विश्वास के लिए चिंताजनक है।

    भागीरथ चौधरी का जवाब

    विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि उनका परिवार लंबे समय से किसान हैं। पीह गांव में उनकी कृषि भूमि पर भूजल स्तर कम होने के कारण उन्होंने वर्षा जल संरक्षण और आधुनिक कृषि सुविधाओं को बढ़ावा देने हेतु लगभग दो करोड़ लीटर जलाशय और पालीहाउस की स्थापना की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह परियोजना पानी संरक्षण एवं उन्नत कृषि तकनीक के प्रसार हेतु है।

    आवेदन प्रक्रिया और सब्सिडी की प्राप्ति

    मंत्री ने बताया कि उन्होंने 2018 में इस योजना के तहत आवेदन किया था। स्थल निरीक्षण, सत्यापन और फोटोग्राफी सहित सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद 2025 में सब्सिडी जारी हुई। उन्होंने यह भी कहा कि पालीहाउस योजना में कुल परियोजना लागत पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान है जो देश के हजारों किसानों को मिलती है, अतः इसमें कोई विशेष रियायत नहीं दी गई है।

    पूर्ण पारदर्शिता का दावा

    भागीरथ चौधरी ने जोर देते हुए कहा कि उन्होंने पूरा प्रोजेक्ट पूरी पारदर्शिता के साथ चलाया है। खेत के बाहर एक सूचना बोर्ड लगाया गया है, जिसमें परियोजना, ऋण और सब्सिडी से संबंधित सभी जानकारी सार्वजनिक है। उन्होंने कहा कि यदि कुछ छिपाना होता तो इस प्रकार खुले तौर पर जानकारी साझा नहीं करते। उनके कृषि फार्म पर कृषि वैज्ञानिक, अधिकारी और किसान आधुनिक खेती के अध्ययन के लिए आते रहते हैं।

    फार्म की तकनीकी विशेषताएं

    मंत्री ने बताया कि उनके फार्म पर चार बड़े तालाब हैं जिनमें वर्षा जल संचित किया जाता है, और इस जल का उपयोग उच्च तकनीक सिंचाई के लिए किया जाता है। पालीहाउस में खीरा, टमाटर, शिमला मिर्च और धनिया जैसी फसलें उगाई जा रही हैं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि बिना सरकारी सहायता के इस प्रकार की परियोजना स्थापित करना आम किसान के लिए कठिन होता है और सरकारी सब्सिडी इसी उद्देश्य से दी जाती है ताकि किसान उन्नत कृषि तकनीकों को अपना सकें। उन्होंने यह भी कहा कि कोल्ड स्टोरेज और पालीहाउस से संबंधित प्रभार अन्य कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर के पास है।

    राजस्थान कांग्रेस का तीखा रुख

    राजस्थान कांग्रेस ने केंद्र सरकार को भी आड़े हाथों लिया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि आम किसान वर्षों तक सरकारी योजनाओं की प्रतीक्षा करते हैं, लेकिन सत्ता के पास बैठे लोगों के मामले तुरंत निपट जाते हैं। प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी आरोप लगाया कि यदि किसी मंत्री को इतना बड़ा लाभ मिला है तो यह जांच का विषय है कि कहीं इससे किसी कुशल किसान के हितों को नुकसान तो नहीं पहुंचा।

    विवाद के दोनों पक्ष कायम

    इस मामले में कांग्रेस हितों के टकराव और पारदर्शिता के सवाल उठा रही है, जबकि भागीरथ चौधरी अपने पक्ष में पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बताते हैं और कहते हैं कि सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ है। इस विवाद में अब तक किसी जांच एजेंसी या विभाग की ओर से नियम उल्लंघन की पुष्टि नहीं हुई है। यदि आगे कोई जांच होती है तो उसके परिणाम के बाद ही विवाद का समाधान संभव होगा।

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