नई दिल्ली, राष्ट्रबाण। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट से मिले सकारात्मक संकेतों का असर गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। कारोबारी सप्ताह के दौरान बाजार ने शानदार शुरुआत की और सेंसेक्स तथा निफ्टी करीब 2 प्रतिशत की बढ़त के साथ खुले। शुरुआती कारोबार में लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे निवेशकों का उत्साह बढ़ गया। बीएसई का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1,609.54 अंक यानी 2.08 प्रतिशत की तेजी के साथ 78,910.94 के स्तर पर खुला। वहीं, एनएसई का निफ्टी 50 भी 417.45 अंक यानी 1.74 प्रतिशत उछलकर 24,378.05 पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने 78,922.44 और निफ्टी ने 24,391.95 का इंट्रा-डे उच्चतम स्तर छुआ। बाजार में आई इस तेजी ने निवेशकों को बड़ी राहत दी।
बैंकिंग और रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी
सेक्टोरल आधार पर बैंकिंग और रियल्टी शेयरों में सबसे अधिक तेजी देखने को मिली। निफ्टी प्राइवेट बैंक सूचकांक 2 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ा, जबकि निफ्टी रियल्टी में 1.86 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा सीमेंट, ऑटो, आईटी, ऑयल एंड गैस और पीएसयू बैंक सेक्टर के शेयरों में भी करीब 1.8 प्रतिशत तक की तेजी रही। एफएमसीजी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मेटल, मीडिया और केमिकल सेक्टर के शेयर भी बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए।
तकनीकी संकेतों से बाजार को मिल रहा समर्थन
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, निफ्टी अभी अपने 200-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (ईएमए) 23,904 के ऊपर बना हुआ है, जो बाजार की मजबूती का संकेत है। वहीं, रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (आरएसआई) बढ़कर 68.55 पर पहुंच गया है। यह बाजार में तेजी की मजबूत गति को दर्शाता है। हालांकि, मौजूदा स्तरों पर निवेशकों की ओर से मुनाफावसूली की संभावना भी बनी हुई है। विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी के लिए 24,000 से 24,200 का स्तर निकट अवधि में महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन है, जबकि 24,500 से 24,700 का दायरा रेजिस्टेंस जोन माना जा रहा है। इन स्तरों के आसपास बाजार की अगली दिशा तय हो सकती है।
विदेशी निवेशकों की खरीदारी से बाजार को मजबूती
भारतीय शेयर बाजार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार खरीदारी से भी समर्थन मिल रहा है। बुधवार को एफआईआई ने लगातार चौथे कारोबारी सत्र में खरीदारी जारी रखी और भारतीय बाजार में 7,284 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने लगातार चौथे दिन बिकवाली की और 3,712 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी चुनाव नतीजों के बाद निवेशकों का ध्यान अब वहां की राजनीतिक परिस्थितियों और भविष्य की नीतियों पर रहेगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी कांग्रेस के बीच संभावित राजनीतिक मतभेद भी आने वाले समय में वैश्विक बाजारों की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।
वैश्विक बाजारों में भी दिखी तेजी, कच्चा तेल 10% लुढ़का
भारतीय बाजार के साथ वैश्विक शेयर बाजारों में भी मजबूती देखने को मिली। अमेरिकी शेयर बाजार में डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 3 प्रतिशत से अधिक उछल गया। इसे चार दशकों में अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद का सबसे मजबूत प्रदर्शन बताया जा रहा है। वहीं, एसएंडपी 500 और नैस्डैक कंपोजिट में भी 1.4 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत के बाद राजनीतिक अनिश्चितता कम होने की उम्मीद से निवेशकों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। दूसरी ओर, ऊर्जा बाजार में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 10 प्रतिशत गिरकर 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे बंद हुई। वहीं, अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड घटकर करीब 4.89 प्रतिशत पर आ गई। विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, कमजोर अमेरिकी डॉलर, विदेशी निवेशकों की वापसी और भू-राजनीतिक तनाव में कमी भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत हैं। यदि ये परिस्थितियां आगे भी अनुकूल बनी रहती हैं, तो आने वाले दिनों में बाजार की तेजी को और मजबूती मिल सकती है।


