जयपुर में मुहर्रम जुलूस के दौरान ऐतिहासिक ‘कुरैशियां का ताजिया’ में आग लगने पर फायर ब्रिगेड की तत्परता से बचा बड़ा हादसा

Rashtrabaan

    जयपुर के बड़ी चौपड़ इलाके में मुहर्रम जुलूस के दौरान एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया जब ऐतिहासिक ‘कुरैशियां का ताजिया’ के गुंबद में अचानक आग लग गई। यह घटना जुलूस के बीच हुई आतिशबाजी की एक चिंगारी के कारण हुई, जो ताजिए के सजावटी गुंबद पर गिर गई और आग लग गई। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो आग तेजी से फैलने लगी लेकिन वहां पहले से तैनात सुरक्षाकर्मियों और आपातकालीन टीमों ने तुरंत स्थिति को नियंत्रण में ले लिया।

    मुहर्रम के मद्देनजर बड़ी चौपड़ पर पहले से तैनात फायर ब्रिगेड की टीम कुछ ही मिनटों में मौके पर पहुंची और आग पर तेजी से काबू पाया। दमकल कर्मियों की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई के कारण आग न तो मौजूद भारी भीड़ तक पहुंची और न ही आसपास की किसी इमारत को नुकसान हुआ।

    जिला प्रशासन ने पूरे जुलूस मार्ग पर पहले से ही दमकल वाहन, पुलिस बल और आपातकालीन राहत दल तैनात कर रखे थे। अधिकारियों ने बताया कि इसी पूर्व तैयारी की वजह से स्थिति पर तेजी से नियंत्रण पाया गया। इस घटना में किसी के घायल होने या जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं है। घटना के बाद हालात सामान्य होने पर मुहर्रम का जुलूस पुनः शुरू कर दिया गया। ताजिए के प्रभावित हिस्से को छोड़कर कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।

    राजस्थान के अन्य हिस्सों में भी मुहर्रम श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की याद में राज्य भर में विभिन्न स्थानों पर ताजिए स्थापित किए गए, जहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचकर दुआएं कीं और फूल अर्पित किए।

    विशेष रूप से जोधपुर में मुहर्रम के अवसर पर मेला जैसा माहौल रहा। मुस्लिम समुदाय के लोग बड़ी संख्या में ताजियों के दर्शन के लिए वहां पहुंचे। मेले में मिठाइयां वितरित की गईं, शरबत के स्टॉल लगाए गए और हलीम जैसे पारंपरिक व्यंजन तैयार कर लोगों में बांटे गए।

    मुहर्रम एकता समिति के अध्यक्ष उस्ताद हाजी हमीम बख्श ने बताया कि जोधपुर में मोती चौक, लाखारा बाजार, उम्मेद चौक, गोलनाड़ी, गुलजारपुरा, खांडा फलसा, नियारियों का मोहल्ला, इशाकिया स्कूल, शाहों का बास, मसूरिया, खेतानाड़ी और सूरसागर कबीर नगर समेत कुल 27 ताजिए स्थापित किए गए। इस आयोजन से स्थानीय समुदाय में एकजुटता और श्रद्धा की भावना को बल मिला है।

    इस प्रकार, मुहर्रम जुलूस के दौरान आई इस अप्रत्याशित परिस्थिति में प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता से बड़ा हादसा टल सका, जिससे भीड़ में मौजूद लोगों और ऐतिहासिक ताजिए दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई।

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