जोधपुर। राजस्थान के जोधपुर स्थित पाओटा जिला अस्पताल में आठ महिलाओं को सी-सेक्शन के बाद गंभीर जटिलताओं का सामना करना पड़ा है। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने आपातकालीन कदम उठाते हुए 25 दवाओं और एक इंजेक्शन के उपयोग को तत्काल निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही सभी संबंधित दवाओं और उपभोग्य सामग्रियों के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, प्रभावित मरीजों को सोडियम लैक्टेट नामक आईवी इंजेक्शन दिया गया था। अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक यह बैच घटना से एक सप्ताह पहले आया था और उसका पहली बार उपयोग किया गया था। चिकित्सकीय सावधानी के तौर पर इस बैच के सभी इंजेक्शनों के उपयोग पर तत्काल प्रतिबंध लगा दिया गया है।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सा विभाग ने एम्स की एक विशेषज्ञ टीम को इस घटना की स्वतंत्र जांच के लिए नियुक्त किया है। जांच पूरी होने तक पाओटा जिला अस्पताल में सर्जिकल प्रक्रियाएं स्थगित रहेंगी। जिन मरीजों को तत्काल सर्जरी की आवश्यकता है, उन्हें नजदीकी माथुरदास माथुर अस्पताल में स्थानांतरित किया जा रहा है।
प्रभावित महिलाओं का अधिकांश इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है, जहां छह महिलाओं की स्थिति अब स्थिर बताई जा रही है। हालांकि, दो महिलाओं में गुर्दे की समस्या के चलते डायलिसिस की जरूरत पड़ी है, और उन्हें बेहतर इलाज के लिए एम्स भेजा गया है।
जिला कलेक्टर आलोक रंजन ने घटना की गंभीरता महसूस करते हुए अस्पताल का दौरा किया और वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच रिपोर्ट मिलने तक दवाओं और उपकरणों के इस्तेमाल पर पूर्ण रोक रहेगी।
पीड़ित परिवारों ने घटना की गहन जांच की मांग की है और आरोप लगाए हैं कि प्रसव के बाद मरीजों को गंभीर रक्तस्राव और अन्य जटिलताओं का सामना करना पड़ा। अस्पताल प्रबंधन ने उनकी बातों को गंभीरता से लेते हुए पूरी जांच का आश्वासन दिया है।
डॉ. कुलबीर चोपड़ा ने बताया कि सोडियम लैक्टेट इंजेक्शनों का उपयोग सामान्यतया सुरक्षित माना जाता है और यह सर्जिकल प्रक्रियाओं के दौरान मानक प्रोटोकॉल का हिस्सा है। इसलिए जटिलताओं का कारण स्पष्ट होने तक उपयोग को रोकना आवश्यक है।
इस पूरे प्रकरण में प्राथमिक जांच, सावधानी और समय पर कार्रवाई की प्रशंसा भी की जा रही है। एम्स की जांच रिपोर्ट अभी आने वाली है, जिसके बाद ही पूरी सच्चाई सामने आएगी। अस्पताल प्रशासन ने कहा है कि वे किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेंगे और जरूरी उपचार जारी रखेंगे।
यह मामला जोधपुर में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण चुनौतियों को उजागर करता है। अधिकारियों की ओर से कहा गया है कि आगामी दिनों में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे और मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि रहेगी।

