वाराणसी। धार के भोजशाला मामले में उच्च न्यायालय द्वारा सुनाया गया फैसला काशी में उत्सव का माहौल लेकर आया है। इस फैसले को लेकर हिंदू पक्ष के वकील मदन मोहन यादव ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि यह निर्णय अभूतपूर्व है और न्यायालय ने एएसआई की रिपोर्ट को मान्यता देते हुए स्पष्ट रूप से फैसला दिया है।
मदन मोहन यादव ने बताया कि उच्च न्यायालय ने एएसआई को आदेश दिया और उसकी रिपोर्ट के आधार पर फैसला सुनाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि इसी तरह के अन्य धार्मिक मामलों में भी कोर्ट को निर्देश देना चाहिए कि वे एएसआई से सर्वे कराएं और उसकी रिपोर्ट के आधार पर जल्द फैसला सुनाएं। यादव ने काशी में शिवलिंग के मिलने की बात बताते हुए कहा कि इसके उपलक्ष्य में पूजा-पाठ का कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा।
ज्ञानवापी मामले में हिंदू पक्ष के एक अन्य पक्षकार डॉ. सोहनलाल आर्य ने कहा कि भोजशाला का फैसला विश्व के सनातन धर्मावलंबियों के लिए बहुत उत्साहजनक है। उन्होंने कहा कि एएसआई की रिपोर्ट को मानते हुए न्यायालय ने इसे मंदिर घोषित किया है। डॉ. आर्य ने तुलना करते हुए कहा कि ज्ञानवापी मामले में भी एएसआई की जांच में प्राप्त शंख, चक्र, गदा, त्रिशूल और पश्चिमी दीवार जैसे अवशेषों से यह साबित होता है कि वह स्थल भी मंदिर था। उन्होंने आशा जताई कि इस प्रकार के एएसआई के निष्कर्षों को मानते हुए ज्ञानवापी का निर्णय भी शीघ्र आएगा।
हिंदू पक्ष के एक और वकील सुभाष नंदन चतुर्वेदी ने भोजशाला फैसले को पक्ष में बताया। उन्होंने कहा कि यह विषय हमारे लिए आशा की किरण लेकर आया है क्योंकि उस वक्त यह वाग्देवी मंदिर और सबसे बड़ा गुरुकुल हुआ करता था। राजा भोज ने इसे बनवाया था, जहां 10 हजार विद्यार्थियों को साथ पढ़ाई की सुविधा थी। उन्होंने बताया कि आक्रमणकारियों ने इसे तोड़ा और वहां मकबरा तथा मस्जिद का स्वरूप दिया।
सुभाष नंदन चतुर्वेदी ने कहा कि भोजशाला मामले में सबूत हमारे पक्ष में थे और वहां मिली कलाकृतियां हिंदू संस्कृति की साक्षी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जिन मंदिरों को तोड़कर मस्जिदें बनाई गईं, उनका पुनः हिंदुओं को मिलना चाहिए। उन्होंने उच्च न्यायालय के फैसले को एक मिसाल बताया और कहा कि इतना जल्द फैसला देना न्यायालय के प्रति हमारी आस्था को मजबूत करता है। उन्होंने न्यायालय का धन्यवाद व्यक्त किया।

