रायपुर : छत्तीसगढ़ में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत जारी प्रारूप मतदाता सूची में जिन लोगों का नाम शामिल नहीं है, उनके लिए राहत की खबर है। भारत निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन नागरिकों का नाम पहले मतदाता सूची में दर्ज था, लेकिन नई प्रारूप सूची में छूट गया है, वे भी दोबारा नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भर सकते हैं। ऐसा करने पर उनके खिलाफ किसी तरह की दंडात्मक या कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
दरअसल, SIR प्रक्रिया के दौरान कई ऐसे मतदाता सामने आए हैं, जिनका नाम पहले की मतदाता सूची में था, लेकिन नई सूची में शामिल नहीं हो पाया। ऐसे लोग फॉर्म-6 भरने से इसलिए हिचकिचा रहे थे, क्योंकि इसमें पहली बार मतदाता सूची में नाम शामिल कराने से संबंधित घोषणा करनी होती है। उन्हें आशंका थी कि पहले से पंजीकृत होने के बावजूद यह घोषणा करने पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कार्रवाई हो सकती है।
इस मामले में निर्वाचन आयोग ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि यदि किसी नागरिक का नाम वर्तमान प्रारूप मतदाता सूची में नहीं है, तो अंतिम सूची में नाम शामिल कराने के लिए उसे फॉर्म-6 जमा करना होगा। पहले मतदाता सूची में नाम दर्ज होने के बावजूद फॉर्म-6 भरना गलत या झूठी घोषणा नहीं माना जाएगा।
दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश का दिया हवाला
आयोग ने अपने स्पष्टीकरण में दिल्ली हाईकोर्ट के 14 अक्टूबर 2026 के फैसले का भी उल्लेख किया है। याचिका संख्या W.P. (C) No. 14955/2026 (निलोत्पल दत्ता एवं अन्य बनाम भारत निर्वाचन आयोग एवं अन्य) में अदालत ने स्पष्ट किया था कि ऐसी स्थिति में गलत घोषणा को लेकर आशंका निराधार है। संबंधित नागरिक नियमानुसार फॉर्म-6 जमा कर सकते हैं।
ERO को कार्रवाई नहीं करने के निर्देश
भारत निर्वाचन आयोग ने सभी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO) को निर्देश दिए हैं कि केवल इस आधार पर किसी आवेदक के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31 के तहत कार्रवाई न की जाए कि उसका नाम पहले की मतदाता सूची में दर्ज था।
हालांकि, आवेदन करने वाले नागरिक को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसका नाम किसी अन्य संसदीय या विधानसभा क्षेत्र की वर्तमान मतदाता सूची में पहले से दर्ज न हो। इसके साथ ही आवेदन निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं और नियमों के अनुरूप होना जरूरी है।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने की अपील
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, छत्तीसगढ़ ने प्रदेश के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत जारी प्रारूप मतदाता सूची में अपना नाम जरूर जांच लें। यदि सूची में नाम नहीं मिलता है तो किसी तरह की आशंका या संकोच किए बिना समय रहते फॉर्म-6 भरकर अपना पंजीकरण सुनिश्चित कराएं।
आयोग के इस स्पष्टीकरण से उन पुराने मतदाताओं को बड़ी राहत मिली है, जिनका नाम SIR के दौरान प्रारूप मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाया है।


