गरियाबंद : छत्तीसगढ़ के जैव विविधता से भरपूर जंगलों में मकड़ियों की दो महत्वपूर्ण प्रजातियों की मौजूदगी सामने आई है। गरियाबंद जिले के देवभोग क्षेत्र स्थित ऋषिझरन जंगल में किए गए शोध के दौरान जाल बनाने वाली मकड़ियों की दो प्रजातियां मिली हैं। इनमें Steatoda cingulata और Theridula gonygaster शामिल हैं। खास बात यह है कि दोनों प्रजातियों का छत्तीसगढ़ में पहली बार वैज्ञानिक रिकॉर्ड दर्ज किया गया है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, इन प्रजातियों के साथ इनके संबंधित वंश (Genera) Steatoda और Theridula का भी राज्य में पहली बार दस्तावेजीकरण हुआ है। यह खोज छत्तीसगढ़ में मकड़ियों की विविधता और उनके भौगोलिक वितरण को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
शोध के दौरान दोनों प्रजातियों को गरियाबंद जिले के देवभोग स्थित ऋषिझरन वन क्षेत्र से हाथों द्वारा एकत्रित किया गया। यह जंगल ओडिशा की सीमा के नजदीक स्थित है। अध्ययन में दोनों मकड़ियों की शारीरिक संरचना और उनकी पहचान से जुड़ी विशेषताओं का विस्तृत विवरण भी दिया गया है।
दोनों प्रजातियों की बनावट इन्हें एक-दूसरे से अलग पहचान देती है। Steatoda cingulata का उदर गहरे चॉकलेटी रंग का होता है, जिसके अगले हिस्से में पीले रंग की एक रेखा दिखाई देती है। वहीं Theridula gonygaster का उदर कालेपन लिए होता है, जिस पर पीले रंग के पांच विशिष्ट धब्बे पाए जाते हैं।
शोधकर्ताओं का कहना है कि छत्तीसगढ़ में जाल बनाने वाली मकड़ियों की प्रजातियों का अब तक सीमित दस्तावेजीकरण हुआ है। ऐसे में इन दोनों प्रजातियों की खोज से राज्य की जैव विविधता से संबंधित वैज्ञानिक जानकारी में विस्तार होगा। साथ ही, भविष्य में मकड़ियों की पहचान, वर्गीकरण और उनके वितरण पर होने वाले शोध के लिए भी यह अध्ययन उपयोगी साबित होगा।
यह खोज एक बार फिर छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों में मौजूद समृद्ध जैव विविधता को सामने लाती है और राज्य में मकड़ियों के वैज्ञानिक अध्ययन के लिए नए रास्ते खोलती है।


