जयपुर। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा द्वारा लगाए गए आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह मामला पहले ही निपटा चुका है और यदि भाजपा सरकार को संदेह है तो वे स्वतंत्र जांच करा सकते हैं। डोटासरा ने मंत्री मीणा पर आरोप लगाया कि वे गृह विभाग में कथित खाद-बीज घोटाले से लोगों का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रहे हैं।
राज्य कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में डोटासरा ने कहा कि मंत्री मीणा को अपने विभाग में भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। उन्होंने कहा कि आरोप लगाने से पहले मंत्री खुद यह सुनिश्चित करें कि उनके विभाग में गड़बड़ी न हो। डोटासरा ने सीमा सुरक्षा और यमुना जल समझौते जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी भाजपा सरकार की आलोचना की।
ओबीसी प्रमाण पत्र और नियुक्तियों से जुड़े आरोपों का जवाब देते हुए डोटासरा ने कहा कि सभी नियम और प्रक्रियाएं सरकार द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार पूरी हुई हैं। उन्होंने बताया कि 2019 के परिपत्र में जो त्रुटि थी, उसे 2021 में सुधार कर दिया गया था और राजस्थान लोक सेवा आयोग को स्पष्ट सूचना दी गई थी।
मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा को पत्र लिखकर डोटासरा और उनके बहनोई पर फर्जी ओबीसी प्रमाण पत्र रखने का आरोप लगाया था और एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। इस पर डोटासरा ने कहा कि यह मामला अदालतों और पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा निपटा चुका है। यदि वर्तमान भाजपा सरकार को इस मामले में संदेह है तो वे जांच करा सकते हैं, जिसमें वे पूरी सहायता देने को तैयार हैं।
डोटासरा ने आरोप लगाया कि मंत्री मीणा पांच साल पुराने मामलों को फिर से उठाकर कृषि विभाग में हो रहे भ्रष्टाचार से ध्यान हटाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग के खिलाफ 2.43 करोड़ रुपए की रिश्वत राशि बरामद हुई है, जिसके लिए खुद मंत्री ने विभाग में अनियमितताओं की बात मानी थी।
उन्होने कहा कि अगर विभाग के निदेशक स्तर के अधिकारी और संबंधित जांच टीम के सदस्य अवैध वसूली करते हुए पाए जाते हैं, तो इसकी नैतिक जिम्मेदारी विभागीय मंत्री और राज्य सरकार दोनों की है। डोटासरा ने कहा कि मंत्री मीणा को यदि वे निर्दोष हैं तो उन्हें मुख्यमंत्री से इस मामले की एसओजी जांच कराने की मांग करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यह घोटाला 300 से 500 करोड़ रुपए तक का हो सकता है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि इतनी बड़ी राशि की बरामदगी के बावजूद प्रवर्तन निदेशालय ने अभी तक क्या कार्रवाई नहीं की, तथा विभाग द्वारा की गई 1,200 छापेमारियों की भी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। डोटासरा ने कहा कि मंत्री को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए ‘लक्ष्मण रेखा’ पार करने से बचना चाहिए और अपने विभाग की गहन जांच करानी चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर जांच में मंत्री मीणा निर्दोष साबित होते हैं तो मैं उनका व्यक्तिगत रूप से धन्यवाद करूंगा।”
स्वास्थ्य व्यवस्था पर डोटासरा ने कहा कि राज्य में अस्पतालों में इलाज और दवाओं की कमी है, जहां दवाएं उपलब्ध हैं वहां नकली दवाएं दी जा रही हैं। उन्होंने कोटा, बीकानेर और जोधपुर में गर्भवती महिलाओं की मौत का हवाला देते हुए राज्य सरकार को असंवेदनशील और लचर बताया। वे बोले कि नकली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन और मिलावटी दवाओं से मरीजों की सेहत बिगड़ रही है। इसके अलावा स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खिमसर की टिप्पणियों की भी उन्होंने आलोचना की।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर डोटासरा ने कांग्रेस की मजबूत स्थिरता का जिक्र करते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों को हटाने से पहले केवल कुछ घंटे का नोटिस देना सांप्रदायिक तनाव बढ़ा सकता है और सरकार की विफलताओं को छिपाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की योजनाओं पर सर्वदलीय बैठक होनी चाहिए और उसकी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए।
कोचिंग संस्थानों को सील करने के मुद्दे पर डोटासरा ने प्रशासन को आगाह करते हुए कहा कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए और नियमित निरीक्षण व सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जाने चाहिए ताकि किसी अनहोनी से बचा जा सके।

