नगर पालिका में काम रुका हो तो जिम्मेदार कौन: अधिकारी, अध्यक्ष या पार्षद

Rashtrabaan

    मध्य प्रदेश के विभिन्न शहरों में बुनियादी सुविधाओं की खराब स्थिति से लेकर अक्सर यह प्रश्न उठता है कि आखिर इसका जिम्मेदार कौन है? जब सड़कें टूटी हों, नालियां जाम हों, कचरा प्रबंधन अव्यवस्थित हो, या स्ट्रीट लाइटें बंद हों, तो आम नागरिक अक्सर यही सोचते हैं कि जिम्मेदारी केवल नगर पालिका के अधिकारियों की है या फिर इसमें नगर पालिका के निर्वाचित अध्यक्ष और पार्षद भी शामिल होते हैं।

    इस प्रश्न का उत्तर न केवल राजनीति के मायने में है, बल्कि इसे मध्य प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1961 और उससे सम्बंधित नियमों में खोजा जा सकता है। यह अधिनियम नगर पालिका के कामकाज को दो मुख्य हिस्सों में बांटता है – एक निर्वाचित परिषद (जिसमें अध्यक्ष और पार्षद होते हैं) और दूसरी प्रशासनिक इकाई जिसे मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) समेत अन्य अधिकारी संभालते हैं। दोनों का कार्य क्षेत्र अलग हैं, लेकिन शहर के विकास की जिम्मेदारी साझा है।

    अध्यक्ष और पार्षद की भूमिका क्या है?

    नगर पालिका अध्यक्ष केवल एक औपचारिक पद नहीं है। नेतृत्व के मामले में वह परिषद का प्रमुख होता है और परिषद की बैठकों की अध्यक्षता करता है। वे विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करते हैं, बजट को मंजूरी देते हैं, अधिकारियों से जवाबदेही मांगते हैं और प्रशासन के कामकाज की निगरानी करते हैं। यदि लंबे समय से किसी क्षेत्र में बुनियादी सुविधाएं ठीक नहीं हो रही हैं, तो जनता अध्यक्ष से जवाब मांगती है। 1998 के नियमों में भी अध्यक्ष-इन-काउंसिल और अन्य प्राधिकारियों के कार्य स्पष्ट किए गए हैं।

    वहीं पार्षद अपने-अपने वार्ड का प्रतिनिधित्व करते हैं। वे स्थानीय समस्याओं को परिषद के सामने उठाते हैं, विकास कार्य के प्रस्ताव देते हैं, बजट पर चर्चा करते हैं और अपने क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए प्रयासरत रहते हैं। इसलिए, वार्ड स्तर पर विकास की जिम्मेदारी भी पार्षदों की होती है।

    अधिकारियों की जिम्मेदारियां क्या हैं?

    मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) एवं अन्य अधिकारी नगरपालिका के प्रशासनिक पक्ष को संभालते हैं। परिषद द्वारा लिए गए निर्णयों का क्रियान्वयन करना, कर्मचारियों को दिशा-निर्देश देना, निर्माण कार्य करवाना, वित्तीय व प्रशासनिक नियंत्रण रखना और कानून के अनुसार नगर पालिका की सेवाएं संचालित करना उनकी जिम्मेदारी होती है। यदि परिषद ने आवश्यक निर्णय ले लिए हैं लेकिन कार्य नहीं हो रहा, तो असल जिम्मेदारी प्रशासनिक अधिकारियों की होती है।

    जिम्मेदारी की स्पष्ट समझ: कौन किसके लिए?

    सफाई व्यवस्था में अध्यक्ष-पार्षद शिकायतों को परिषद तक पहुँचाते हैं और बजट उपलब्ध कराने का प्रयास करते हैं, जबकि अधिकारी सफाई कर्मचारियों को ड्यूटी देते हैं और सफाई को नियमित बनाते हैं।

    स्ट्रीट लाइट के मामले में, गैर काम करने वाली लाइटों की शिकायत अध्यक्ष-पार्षद उठाते हैं, बजट प्रस्तावित करते हैं और काम पर नजर रखते हैं; अधिकारी मरम्मत और रखरखाव करते हैं।

    पेयजल व्यवस्था की देखरेख में अध्यक्ष-पार्षद योजना और बजट देते हैं तथा शिकायतें परिषद में उठाते हैं, अधिकारियों का काम पाइपलाइन मरम्मत और पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करना होता है।

    अतिक्रमण हटाने के संबंध में, अध्यक्ष और पार्षद शिकायतें सांसद करते हैं और कार्रवाई की माँग करते हैं, जबकि अधिकारी कानूनी नोटिस जारी कर अतिक्रमण हटाने के अभियान को अंजाम देते हैं।

    सड़क और नालियों की मरम्मत के लिए अध्यक्ष और पार्षद बजट और प्रस्तावों को मंजूरी देते हैं, अधिकारी टेंडर प्रक्रिया पूरी करते और काम की गुणवत्ता सुनिश्चित करते हैं।

    कचरा प्रबंधन में अध्यक्ष-पार्षद निगरानी करते हैं और शिकायत हल कराने की कोशिश करते हैं, जबकि अधिकारी कचरा संग्रहण, परिवहन और निस्तारण के लिए जिम्मेदार होते हैं।

    क्या केवल अधिकारियों को दोष देना न्यायसंगत है?

    केवल अधिकारियों को दोष देना उचित नहीं होगा। यदि अधिकारी वैध कदमों को लागू करने में विफल रहते हैं, तो उनकी जिम्मेदारी निश्चित है। लेकिन यदि निर्वाचित परिषद जरूरी फैसले नहीं लेती, समस्या नहीं उठाती या निगरानी नहीं करती, तो राजनीति में चुने हुए जनप्रतिनिधियों की भी जिम्मेदारी बनती है। यानि प्रशासन कार्यों का क्रियान्वयन करता है, जबकि नीति निर्धारण, नेतृत्व और जनता के प्रति जवाबदेही निर्वाचित प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है।

    कानूनी दायरे में जिम्मेदारी

    मध्य प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1961 के अनुसार नगर पालिका का संचालन निर्वाचित परिषद और प्रशासनिक अधिकारियों के संयुक्त चरित्र पर होता है। 1998 के नियमों ने अध्यक्ष-इन-काउंसिल, मुख्य नगर पालिका अधिकारी और अन्य प्राधिकारियों के कार्य विस्तार से बताए हैं। इसलिए नगर की सफलता या विफलता का श्रेय केवल किसी एक पक्ष को देना सही नहीं होगा।

    अंततः यह समझना जरूरी है कि जब शहर में सफाई, स्ट्रीट लाइट, पेयजल, सड़क, नाली, अतिक्रमण जैसी बुनियादी सुविधाएं बाधित होती हैं तो जनता को केवल प्रशासनिक अधिकारियों से ही नहीं, बल्कि अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों से भी जवाबदेही मांगनी चाहिए। लोकतंत्र में अधिकारी प्रशासन चलाते हैं, लेकिन जनप्रतिनिधि जनता के लिए जिम्मेदार होते हैं। तभी नगर की वास्तविक प्रगति संभव हो पाएगी, जब दोनों ईमानदारी और तत्परता से अपनी जिम्मेदारियां निभाएँगे।

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