नीट विवाद पर राहुल गांधी का बड़ा हमला
जयपुर। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कोटा के दशहरा मैदान में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान छात्रों से खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम राजनीतिक नहीं बल्कि छात्रों की भव्य आकांक्षाओं और भविष्य की चिंता से जुड़ा है।
राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था की तीखा और गंभीर आलोचना की। उन्होंने कहा कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली बच्चों पर अत्यधिक दबाव डालती है, जो उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। उन्होंने बताया कि छात्रों के आत्महत्या की बढ़ती संख्या इस प्रणाली की विफलता को दर्शाती है। यह अकेले छात्रों की कमजोरी नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की हार है।
उन्होंने कहा, “हमें सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी बच्चा आत्महत्या जैसे भयावह कदम न उठाए। यह हमारी जिम्मेदारी है कि शिक्षा प्रणाली को सुधारें और इसे मानवतावादी बनाएं।” राहुल गांधी ने बताया कि हजारों छात्रों में से मात्र बारह को रोजगार मिलता है। इस तथ्य को उन्होंने शिक्षा प्रणाली द्वारा छात्राओं और छात्रों की उपेक्षा के सबूत के रूप में पेश किया।
राहुल गांधी ने बताया कि बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग और मेडिकल स्नातक बेरोजगार हैं और कई को आर्थिक तंगी के कारण गिग इकोनॉमी या मजदूरी करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति बहुत चिंताजनक है और इसे रोकने के लिए तत्काल सुधारों की आवश्यकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि नीट और जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाएं छात्रों को अत्यधिक दबाव में डालती हैं। इन परीक्षाओं में लाखों छात्र हिस्सा लेते हैं, लेकिन केवल कुछ ही सफल होते हैं। उन्होंने इसे एक “रिजेक्शन सिस्टम” कहा जो छात्रों के सपनों को कुचलता है और उनकी उम्मीदों पर पानी फेरता है।
राहुल गांधी ने युवाओं के समर्थन में आवाज उठाते हुए कहा कि शिक्षा प्रणाली को छात्रों के लिए मुकम्मल अवसर प्रदान करना चाहिए, न कि अस्वीकार की एक कठोर व्यवस्था बननी चाहिए। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यह उनकी लड़ाई है, जो शिक्षा सुधार और छात्र हितों के लिए दीर्घकालिक लड़ाई होगी।

