पीट हेगसेथ का बयान: यूएस खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष नहीं चाहता

Rashtrabaan

    अमेरिकी अधिकारी पीट हेगसेथ ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ का उद्देश्य केवल रक्षा है और इसे अस्थायी माना गया है। उन्होंने कहा कि यह मिशन केवल निर्दोष वाणिज्यिक जहाजों को ईरानी आक्रामकता से बचाने के लिए है, न कि किसी लड़ाई के लिए।

    हेगसेथ ने एक ब्रिफिंग के दौरान कहा, “प्रोजेक्ट फ्रीडम रक्षात्मक है, इसका दायरा सीमित है और इसकी अवधि भी अस्थायी है। इसका एकमात्र लक्ष्य निर्दोष वाणिज्यिक परिवहन की रक्षा करना है, जो ईरान की आक्रामकता का शिकार हो सकता है। अमेरिकी बलों को ईरानी जलक्षेत्र या वायु क्षेत्र में प्रवेश करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, क्योंकि यह आवश्यक भी नहीं है। हम लड़ाई की तलाश में नहीं हैं।”

    उन्होंने यह बात उस संदर्भ में कही है जब मध्य पूर्वी समुद्री क्षेत्र, विशेषकर हॉर्मूज की खाड़ी की स्थिति तनावपूर्ण होती जा रही है। इस संकीर्ण जल मार्ग का महत्व विश्व व्यापार में अत्यधिक है, क्योंकि यहां से वैश्विक तेल निर्यात का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। पिछले कुछ महीनों में ईरान और पश्चिमी देशों के बीच मतभेदों ने क्षेत्र में सैनिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया है, जिससे वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

    उल्लेखनीय है कि इस समय प्रोजेक्ट फ्रीडम के तहत अमेरिकी फौजियों की भूमिका सिर्फ निगरानी और सुरक्षा प्रदान करने तक सीमित रहेगी। यह मिशन ईरानी जल और वायुमंडल में नहीं जाएगी, जिससे तनाव कम रखने का प्रयास किया जाएगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के रक्षात्मक मिशन से क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इसी के साथ प्रशासन ने साफ किया है कि सुरक्षा अभियान का मकसद खाड़ी में किसी भी तरह की लड़ाई या टकराव को बढ़ावा देना नहीं है, बल्कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

    पीट हेगसेथ के इस बयान से अमेरिका की विदेश नीति की दिशा साफ होती है, जो तनाव बढ़ाने की बजाय शांति और स्थिरता बनाए रखने पर केंद्रित है। उनके कथन से यह स्पष्ट है कि अमेरिका इस क्षेत्र में सक्रिय जरूर रहेगा, लेकिन संघर्ष का पक्ष नहीं लेगा।

    आगे की घटनाओं पर निगरानी रखी जाएगी, लेकिन फिलहाल ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को एक संयमित और सीमित मिशन के रूप में देखा जा रहा है जो व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है।

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    See also  {"title_results":["टिहरान पर हेलीकॉप्टर दुर्घटना का आरोप लगाने के बाद अमेरिका ने ईरान पर शुरू किए हवाई हमले, जिसके बाद हुई प्रतिशोधात्मक कार्रवाई"],"content_results":["ईरान ने बहरीन और कुवैत पर किए गए हमलों के साथ अपनी प्रतिशोधात्मक कार्रवाइयों को और भी व्यापक कर दिया है, जो युद्ध समाप्ति की संभावित वार्ताओं को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। ये हमले उस समय हुए हैं जब क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच चुका है और विभिन्न देशों के बीच संघर्ष की आशंका बढ़ रही है।मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने बहरीन और कुवैत में रणनीतिक स्थानों पर निशाना साधते हुए हमला किया। दोनों देशों ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए संयुक्त प्रयास करने का आग्रह किया है। ईरानी अधिकारियों ने अपनी कार्रवाई को "स्व-रक्षा" बताया है और कहा है कि वे क्षेत्र में किसी भी प्रकार की धमकी का जवाब देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।विश्लेषकों का कहना है कि ईरान की ये नई रणनीति क्षेत्रीय शक्तियों के बीच बढ़ते तनाव को और विराट कर सकती है। इससे मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने की दिशा में जारी बातचीत विफल होने का खतरा बढ़ जाएगा। वहीं, बहरीन और कुवैत ने भी इस मामले को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की बात कही है।आर्थिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से भी ये हमले महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति इस क्षेत्र से गुजरती है, इसलिए इन हमलों का वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी असर पड़ने की संभावना है। विशेषज्ञ मानते हैं कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए इस तनाव को तत्काल कम करना आवश्यक है।इस पूरे घटनाक्रम ने क्षेत्रीय राज्यों के बीच संवाद और समीक्षा की प्रक्रिया को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। वैश्विक समुदाय को भी मध्यस्थता के माध्यम से शांति सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय भूमिका निभानी होगी। इसके बिना युद्ध की संभावना बढ़ते हुए देखी जा रही है, जो पूरी दुनिया के लिए चिंताजनक होगा।"]}
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